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पहाड़ों का च्यूरा अब आधुनिक दवाओं का स्त्रोत बनेगा

पहाड़ों का च्यूरा अब आधुनिक दवाओं का स्त्रोत बनेगा

संक्षेप: मोहन भट्ट। हल्द्वानी। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों व हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाने

Wed, 5 Nov 2025 11:21 AMNewswrap हिन्दुस्तान, हल्द्वानी
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मोहन भट्ट। हल्द्वानी। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों व हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाने वाला च्यूरा आधुनिक दवाओं को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दिल्ली फार्मास्यूटिकल साइंसेज एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी (डीपीएसआरयू) में चार साल हुई शोध के बाद यह बात सामने आयी है। इस शोष को हाल ही में जर्नल ऑफ फार्मास्यूटिकल इनोवेशन (स्प्रिंजर नेचर) में प्रकाशित किया गया है। इस विषय पर गहन शोध कर रहे उत्तराखंड मूल के डीपीएसआरयू में प्रोफेसर डॉ. देवेश तिवारी ने बताया कि च्यूरा से अत्याधुनिक नैनो-ड्रग डिलीवरी प्रणाली ‘ब्युटायरोसोम्स’ विकसित की गई है, जो आधुनिक दवाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण है। शोध टीम डॉ. गौरव जैन, डॉ. अनूप कुमार, स्कॉलर नीतिश जगंवान, अभिषेक आनंद व ज्योति हिस्सा रहे।

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यहां पाया जाता है च्यूरा उत्तराखंड के पिथौरागढ़, चंपावत, अल्मोड़ा और गढ़वाल में काफी मात्रा में च्यूरा के पेड़ पाए जाते हैं। इसके अलावा हिमालयी देशों नेपाल, भूटान, सिक्किम, चीन आदि में भी पाया जाता है। च्यूरा का वैज्ञानिक नाम डिप्लोकनेमा ब्यूटायरेसिया है, जो कि सेपोटेसी परिवार का पेड़ है। डॉ. तिवारी ने बताया कि उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में बहुतायत मात्रा में पाए जाने वाले च्यूरा का उपयोग साबून, शैम्पू व घी बनाने में किया जाता है। जबकि च्यूरा विभिन्न वसा (लिपिड्स) का महत्वपूर्ण श्रोत है बीजों से निकाला जाता है घी च्यूरा को स्थानीय भाषा में फुलवारा और कल्पवृक्ष नाम से जाना जाता है। स्थानीय लोग आमतौर पर च्यूरा के बीजों से घी निकाल कर दैनिक जीवन में खाने के लिए उपयोग करते हैं। इस कारण इसे इंडियन बटर ट्री कहा जाता है और घी को च्यूरा घी, फुलवारा घी कहा जाता है। साथ ही च्यूरा घी को विभिन्न औषधीय रूप में उपयोग किया जाता है। स्थानीय रोजगार में निभा सकता है महत्वपूर्ण भूमिका उत्तराखंड में स्थापित फार्मास्यूटिकल कंपनियों में विभिन्न दवाइयों का निर्माण होता है। शोध के बाद कहा जा सकता है कि च्यूरा घी को कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त किया जा सकता है। यह अत्याधुनिक सस्टेन रिलीज ड्रग प्रणाली की दवाओं को विकसित करने में मददगार हो सकता है। स्थानीय स्तर पर च्यूरा की खेती से जहां सस्ता कच्चा माल मिल सकता है, वहीं स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा। च्यूरा प्रदेश ही नहीं बल्कि देश की आर्थिकी में विशेष योगदान दे सकता है।