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8 अप्रैल, 2020|8:49|IST

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रिश्वत के आरोपी रजिस्ट्रार कानूनगो को साढ़े चार साल की सजा

रिश्वत के आरोपी रजिस्ट्रार कानूनगो को साढ़े चार साल की सजा

रिश्वत के आरोपी रजिस्ट्रार कानूनगो हेमराज चौहान को अदालत ने शुक्रवार को सजा सुना दी। उसे साढ़े चार वर्ष की सजा और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने पर छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण कुमकुम रानी की न्यायालय ने मामले में सुनवाई की। बता दें कि न्यायालय ने बीती 12 फरवरी को आरोपी पर दोष सिद्ध किया था।

अभियोजन पक्ष की ओर से संयुक्त निदेशक विधि दुर्योधन जंगपांगी ने न्यायालय में पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि 21 जून 2012 को गदरपुर निवासी ताहिर हुसैन ने विजिलेंस टीम को आरोपी रजिस्ट्रार कानून गो द्वारा रिश्वत मांगने के बारे में बताया था। कहा कि उसकी माता खूबी बेगम 70 वर्षीय वृद्धा हैं। शारीरिक अस्वस्थता के चलते वह अपनी जमीन अपने पुत्र ताहिर समेत शकील, तौकीक व जरीफ के नाम कराना चाहती थीं। इसी कारण उन्होंने दो अलग-अलग प्रार्थना पत्र देकर सीलिंग प्रमाणपत्र के लिए हल्का पटवारी के यहां प्रार्थना पत्र दिया। पटवारी की ओर से रिपोर्ट अग्रसारित भी कर दी गई थी। ताहिर का आरोप था कि सीलिंग प्रमाणपत्र के लिए गदरपुर में कार्यरत रजिस्ट्रार कानूनगो हेमराज चौहान ने प्रति प्रार्थना पत्र एक हजार रुपये की मांग की। सूचना के बाद विजिलेंस टीम की ओर से इसकी पड़ताल की गई। 23 जून को विजिलेंस टीम ने आरोपी हेमराज को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। वाद की सुनवाई में अभियोजन की ओर से विजिलेंस अधिकारी समेत अन्य सदस्यों की गवाही कराई गई।

शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण कुमकुम रानी ने आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 में तीन वर्ष का कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माना, जबकि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1/डी) के तहत साढ़े चार वर्ष के कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। कहा गया कि जुर्माना न देने पर 6-6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

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  • Web Title:Bribery's registrar laws upheld for four-and-a-half years