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एसटीएच के अर्जुन नेत्र बैंक ने 100 को दी आंखों की रोशनी

एसटीएच के अर्जुन नेत्र बैंक ने 100 को दी आंखों की रोशनी

संक्षेप:

हल्द्वानी के डॉ. सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज से जुड़े अर्जुन नेत्र बैंक ने 100 मरीजों को सफल कॉर्निया ट्रांसप्लांट कर आंखों की रोशनी दी है। टीम की मेहनत से 72 लोगों से कॉर्निया प्राप्त कर 100 से ज्यादा सफल प्रत्यारोपण किए गए हैं। हालांकि, बैंक को संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

Dec 02, 2025 11:41 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, हल्द्वानी
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हल्द्वानी। डॉ. सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अर्जुन नेत्र बैंक ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। नेत्र बैंक ने अब तक 100 मरीजों को सफल कॉर्निया ट्रांसप्लांट कर आंखों की रोशनी दी है। इस उपलब्धि को नेत्र रोग विभाग में सोमवार को डॉक्टरों, स्टाफ और मरीजों ने एक साथ केक काटकर उत्साह के साथ मनाया। अगस्त 2022 में शुरू हुए इस नेत्र बैंक ने कम संसाधनों में भी बेहतरीन काम किया है। मृतकों के परिजनों को समझा कर कॉर्निया दान करवाना और फिर उसका सफल प्रत्यारोपण करना आसान नहीं होता, लेकिन टीम की मेहनत से यह संभव हो पाया है।

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टीम अब तक 72 लोगों से कॉर्निया ले चुकी है। जिन से कॉर्निया लिया जाता है सभी की दोनों आंखों की कॉर्निया ठीक नहीं होती है। टीम 100 से ज्यादा कॉर्निया सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किए जा चुके हैं। इस दौरान प्राचार्य व नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. गोविंद सिंह तितियाल ने टीम को बधाई देते हुए कहा कि कॉर्निया ट्रांसप्लांट के कार्य में तेजी लाई जाएगी। इस दौरान नेत्र रोग विभाग के एचओडी डॉ. नितिन मेहरोत्रा, डॉ. प्रतीक कौल, पीजी डॉ. मोनिका, डॉ. एशवर्या, डॉ. चयनिका, टैक्नीशियन एचएस मेहरा, गोविंद पांडे, सुरेन्द्र नेगी आदि मौजूद रहे। संसाधनों का अभाव खुशी के इस मौके पर नेत्र बैंक की कड़वी सच्चाई भी सामने आई। बैंक के पास न तो अपनी एम्बुलेंस है और न ही पर्याप्त डॉक्टर व तकनीकी स्टाफ। कॉर्निया निकालने के लिए टीम को दूसरी एम्बुलेंस या निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। नेत्र रोग विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार जल्द एम्बुलेंस, अतिरिक्त डॉक्टर और तकनीशियन उपलब्ध कराए तो नेत्र बैंक प्रत्यारोपण की संख्या में वृद्धि हो सकती है। रोज एक व्यक्ति को दी जा सकती है रोशनी एसटीएच में आए दिन गंभीर रूप से बीमार लोगों की मौत होती है। इन मरीजों के परिजनों को अगर नेत्रदान का महत्व को समझाया जाए तो वह नेत्रदान करेंगे। लेकिन एसटीएच के पास ऐसे काउंसलर नहीं है जो लोगों को नेत्रदान के लिए प्रोत्साहित करें। ना ही एसटीएच में नेत्रदान के प्रचार प्रसार किया जाता है। जानकारों का कहना है कि एसटीएच में जिन लोगों की मौत होती है अगर उनकी कार्निया निकाली जाए तो करीब रोज एक व्यक्ति को रोशनी दी जा सकती है।