हलाला केस में नई साजिश! पीड़िता का परिवार साइबर अटैक का शिकार, सारे सबूत मिटाए

रुड़की, हिन्दुस्तान, मोनू शर्मा
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यूसीसी लागू होने के बाद उत्तराखंड के पहले हलाला केस में पीड़ित परिवार पर नया वार हुआ है। पीड़िता के भाई का फोन हैक किया गया है। पीड़िता के पति के रिश्तेदार पर फोन हैक कर सारे सबूत मिटाने का आरोप लगा है।

what is Halala in muslims

बीते दिनों उत्तराखंड की रुड़की पुलिस ने हलाला और तीन तलाक मामले में अदालत में आरोप पत्र दायर किए थे। यूसीसी लागू होने के बाद हलाला का यह पहला मामला है। इसमें पहली बार यूसीसी के तहत केस दर्ज किया गया। अब इस सनसनीखेज मामले में नया ट्विस्ट आ गया है। पीड़िता के परिवार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले से ही सामाजिक और मानसिक प्रताड़ना झेल रहे इस परिवार पर अब एक और नया वार हुआ है। ताजा मामले में पीड़िता के सगे भाई का मोबाइल हैक कर लिया और केस से जुड़े अहम साक्ष्य उड़ा दिए हैं। इसका आरोप महिला के पति के एक रिश्तेदार पर है। पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मामला क्या है

बुग्गावाला थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी एक महिला ने पांच अप्रैल को पुलिस को तहरीर देकर पति और ससुरालियों पर दहेज के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। इस मामले में पीड़िता ने पति पर तीन तलाक देने और हलाला का दबाव बनाने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए थे। इस मामले की शिकायत एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर से भी की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने पुलिस को केस दर्ज करने के आदेश जारी किए थे। इस मामले में देश में पहली बार उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद यूसीसी के तहत यूसीसी एक्ट की धारा-32(1)(2) व 32 (3) की बढ़ोत्तरी गई थी। साथ ही इस मामले में पांच दिन पूर्व रुड़की कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी।

पति-ससुर समेत पांच नामजद

इस मामले में पुलिस ने पीड़िता के पति मोहम्मद दानिश, ससुर सईद, जेठ अरसद, देवर प्रवेज, जावेद, सास गुलशाना, ननंद सलमा, नंदोई फैजान गांव मजाहिदपुर सतीवाला मजबता बंदरजूड, बुग्गावाला और पीड़िता के पति रहमान निवासी टर्नल रोड, देहरादून के खिलाफ केस दर्ज किया था। यह मामला देशभर में सुर्खियों में छाया हुआ है। अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है।

पीड़िता के भाई का फोन हैक

इस मामले में पीड़िता के भाई ने बहन के पति के रिश्तेदार रहमान पर मोबाइल हैक करने का आरोप लगाया है। आरोप लगाया कि रहमान ने उनके मोबाइल में ई-मेल आईडी, पासवर्ड हैक कर पूरा डाटा उड़ा दिया है। आरोप लगाया कि केस से जुड़े और कुछ जरूरी फाइलें, व्हाट्सएप चैट्स और कॉल रिकॉर्ड्स डिलीट कर दिए हैं। इस मामले में पुलिस ने जांच की तो रहमान की ओर से हैक कर मोबाइल का पूरा डाटा उड़ाने की पुष्टि हुई है। आरोप की पुष्टि होने पर पुलिस ने रविवार की देर शाम रहमान के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

रहमान ने पीड़िता के भाई की बनाई थी एक वेबसाइट

पीड़िता के भाई ने बताया कि कुछ माह पूर्व रहमान ने उसकी एक वेबसाइट भी बनाई थी। इसके लिए रहमान ने आधार कार्ड पैन कार्ड भी लिए थे। आरोप लगाया कि रहमान उनकी वेबसाइट और दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर सकता है। पीड़ित ने पुलिस से मामले की गहनता से जांच करने की मांग की है।

एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर का कहना है कि पीड़िता के भाई ने अपने जीजा के रिश्तेदार रहमान पर मोबाइल हैक कर डाटा गायब के आरोप लगाए थे। इस मामले की जांच की तो आरोप सही पाए गए हैं। इसके बाद पीड़िता के भाई की तहरीर पर रहमान के खिलाफ आईटी ऐक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है।

‘इस्लाम में तीन तलाक बड़ा गुनाह, हलाला हराम’

देहरादूनः तीन तलाक और हलाला जैसी कुप्रथाओं को रोकने को केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा सख्त कानून बनाए गए हैं। वहीं, इस्लाम एवं शरीयत भी इन कुप्रथाओं की पुरजोर मुखालफत करता है। रुड़की में समान नागरिक संहिता के तहत हलाला का पहला मामला दर्ज होने के बाद अब फिर इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। उलमा एवं मुस्लिम मामलों के जानकारों ने एक सुर में तीन तलाक को बड़ा गुनाह और योजनाबद्ध हलाला को हराम बताया है। चंद लोगों की वजह से पूरी कौम बदनाम होती है।

तीन साल की सजा और एक लाख जुर्माना

अधिवक्ता शिवा वर्मा ने बताया कि यूसीसी के तहत हलाला जैसी कुप्रथा को बढ़ावा देने, उसे करवाने या उसमें शामिल होने पर तीन वर्ष तक की सजा एवं एक लाख रुपये के जुर्माने का कड़ा प्रावधान है। कानून में यह भी व्यवस्था की गई है कि तलाक के बाद पति-पत्नी बिना किसी मध्यवर्ती प्रक्रिया के दोबारा सीधे निकाह कर सकते हैं। उधर, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा कि पति गुस्से एवं नशे में तीन तलाक दे देता है, लेकिन हलाला जैसी घिनौनी कुप्रथा का दर्द महिलाओं को झेलना पड़ता है।

जमीयत उलमा और शहर काजी क्या बोले

देहरादून शहर मुफ्ती सलीम अहमद कासमी ने कहा कि इस्लाम ने महिलाओं को इज्जत और अधिकार दिए हैं। पैगंबर मोहम्मद साहब ने एक साथ तीन तलाक को सख्त नापसंद फरमाया है। तीन तलाक के समाधान के नाम पर हलाला जैसी घिनौनी प्रथा को अपनाना इस्लाम का मजाक उड़ाना है। जमीयत उलमा-ए-हिंद जिला सदर मौलाना अब्दुल मन्नान कासमी ने कहा कि एक बार में तीन तलाक बोलना शरीयत में सख्त गुनाह है। इस्लाम ने निकाह जैसे पवित्र रिश्ते को सोच-समझकर निभाने की हिदायत दी है। सुनियोजित हलाला करने और कराने वाले, दोनों पर अल्लाह की लानत है।

शहर काजी मुफ्ती हशीम सिद्दीकी ने कहा कि निकाह जैसे पवित्र सामाजिक और धार्मिक अनुबंध को गुस्से में तीन शब्दों के साथ खत्म करना शरीयत के नियमों का खुला उल्लंघन है। तथाकथित हलाला का रास्ता नाजायज और गुनाह-ए-अजीम है। समाज को इस अज्ञानता के खिलाफ उठ खड़ा होना चाहिए।

Gaurav Kala

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गौरव काला: वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम सदस्य

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