
खुशखबरीः 2013 की जलप्रलय के बाद पहली बार पुराने रास्ते से पहुंचेंगे बाबा केदार के धाम
2013 kedarnath Floods: वर्ष 2013 की आपदा में जगह-जगह ध्वस्त हुए केदारनाथ धाम के पुराने और पारंपरिक पैदल मार्ग को अब लोक निर्माण विभाग और डीडीएमए ने दुरुस्त कर दिया है। रामबाड़ा और गरुड़चट्टी के बीच 5.35 किलोमीटर का पैदल मार्ग भी बना लिया है।
2013 kedarnath Floods: वर्ष 2026 में केदारनाथ धाम की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं ने लिए बड़ी खुशखबरी है। इस बार तीर्थयात्री, बाबा के धाम तक पहुंचने के लिए उसी पुराने रास्ते का इस्तेमाल कर पाएंगे जो वर्ष 2013 की आपदा में ध्वस्त हो गया था। इससे यात्री परंपरागत पैदल मार्ग का अनुभव कर सकेंगे। लोक निर्माण विभाग और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने केदारनाथ धाम तक का पुराना मार्ग पूरी तरह दुरुस्त कर दिया है।
बाबा केदार के धाम की यात्रा के दौरान इस बार तीर्थयात्रियों के पास रामबाड़ा से केदारनाथ तक पहुंचने के दो विकल्प होंगे। लोनिवि-डीडीएमए ने गरुड़चट्टी से केदारनाथ पैदल सफर के लिए 3.30 किलोमीटर का मार्ग वर्ष 2024 में तैयार कर लिया था। इसके अलावा वर्ष 2023 और 2024 में दो चरणों में रामबाड़ा और गरुड़चट्टी के बीच 5.35 किलोमीटर का पैदल मार्ग भी बना लिया था। वर्तमान में इस मार्ग की रेलिंग पर पेंटिंग का काम जारी है। हालांकि यह प्रशासन पर निर्भर करेगा कि वह तीर्थयात्रियों की आवाजाही कौन से मार्ग से कराता है। रामबाड़ा से गरुड़चट्टी-केदारनाथ पैदल मार्ग पर घोड़े-खच्चरों की आवाजाही कठिन बताई जा रही है। ऐसे में यात्रियों को केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने के मौके पर ही पुराने पैदल मार्ग से गुजरने का अवसर मिल सकेगा।
15 दिन के भीतर रामबाड़ा पुल भी तैयार होगा
लोनिवि-डीडीएमए के अधिशासी अभियंता राजविन्द सिंह ने बताया कि केदारनाथ यात्रा के लिए रामबाड़ा-गरुड़चट्टी पैदल मार्ग तैयार हो चुका है। बर्फबारी का सीजन समाप्त होते ही 15 दिन के भीतर रामबाड़ा में पुल भी तैयार कर लिया जाएगा। इसके लिए सभी जरूरी सामान मौके पर पहुंच चुका है।
देवदर्शनी : जहां जागती है आस्था
केदारनाथ के पुराने मार्ग की सबसे बड़ी विशेषता ‘देवदर्शनी’ स्थल है। जैसे ही श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे, उन्हें बाबा केदार के भव्य धाम के सीधे दर्शन होंगे। धार्मिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण इस स्थान पर पहुंचते ही यात्रियों की पूरी थकान मिट जाती है और एक अलौकिक शांति का अनुभव होता है।
1.5 किमी कम होगा पुराने मार्ग से सफर नए रास्ते के सापेक्ष
आपदा से पहले रामबाड़ा से केदारनाथ धाम की दूरी सात किलोमीटर थी। आपदा में मार्ग ध्वस्त होने के बाद, इसे बनाने को लोनिवि को कुछ बैंड डालने पड़े जिससे रास्ता 8.65 किलोमीटर का हो गया। इसमें रामबाड़ा से गरुड़चट्टी की दूरी 5.35 और गरुड़चट्टी से केदारनाथ की दूरी 3.30 किमी है। हालांकि लोनिवि का कहना है कि यह रास्ता, नए मार्ग से फिर भी डेढ़ किलोमीटर कम है। गौरीकुंड से रामबाड़ा-गरुड़चट्टी होते हुए केदारनाथ तक की कुल दूरी 15.30 किलोमीटर है। गौरीकुंड से रामबाड़ा-लिंचौली होते हुए पैदल मार्ग की कुल दूरी 16.30 किलोमीटर है।

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