देहरादून में गैस एजेंसी मालिक का मर्डर, स्कूटी सवार युवकों ने सीने में गोली मारी; 15 दिन में चौथी हत्या
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बुधवार सुबह एक गैस एजेंसी के मालिक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वह परेड ग्राउंड स्थित स्टेडियम से टेनिस खेलने के बाद अपने घर जाने के लिए बाहर निकल रहे थे। इसी दौरान स्कूटी सवार दो अज्ञात युवकों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बुधवार सुबह एक गैस एजेंसी के मालिक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वह परेड ग्राउंड स्थित स्टेडियम से टेनिस खेलने के बाद अपने घर जाने के लिए बाहर निकल रहे थे। इसी दौरान स्कूटी सवार दो अज्ञात युवकों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।
देहरादून के तिब्बती मार्केट में बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे स्कूटी सवार दो अज्ञात बदमाशों ने एक युवक की सीने पर सटाकर गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान अर्जुन शर्मा (करीब 40 वर्ष) के रूप में हुई है। वह जीएमएस रोड स्थित अमरदीप गैस एजेंसी के मालिक थे और वसंत विहार थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर के रहते थे। उनके पिता शहीद थे। उनकी माता को गैस एजेंसी आवंटित हुई थी।
सीने पर बिल्कुल सटाकर गोली मारी
जानकारी के अनुसार, अर्जुन शर्मा सुबह परेड ग्राउंड में टेनिस खेलने आए थे। खेल के बाद वह तिब्बती मार्केट के पास से पाइनएप्पल खरीदकर पैदल ही अपनी कार की तरफ लौट रहे थे। तभी स्कूटी सवार दो बदमाश वहां पहुंचे और उन्होंने अर्जुन के सीने पर बिल्कुल सटाकर गोली मार दी। घटना की सूचना मिलते ही डालनवाला कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। गंभीर रूप से घायल अर्जुन को तुरंत दून अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शव को मोर्चरी में रखवाया गया है।
पारिवारिक विवाद का राज खुला
इस हत्याकांड के पीछे गहरी साजिश और रंजिश की बात सामने आ रही है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि मृतक का पारिवारिक व्यवसाय को लेकर अपने ही परिवार से विवाद चल रहा था। एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने बताया कि मृतक की माता ने उच्च न्यायालय से अपने ही बेटे से जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा ली हुई थी।
42 करोड़ की उधारी की बात
वहीं, गैस एजेंसी में काम करने वाले कर्मचारी विजय ने एक सनसनीखेज खुलासा किया है। विजय के मुताबिक, मामला 42 करोड़ रुपये की उधारी से जुड़ा है और उसने एक व्यक्ति विशेष का नाम लेकर धमकी देने के आरोप भी लगाए हैं। मौके पर खड़ी मृतक की कार का नंबर '786' भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
एक पखवाड़े में हत्या की चौथी घटना
शहर के बीचोबीच हत्या की खबर से सनसनी का माहौल बन गया है। क्योंकि जिले में पिछले एक पखवाड़े में लगातार हत्या की यह चौथी घटना है। इससे पहले 29 जनवरी को विकासनगर में 18 साल की छात्रा, 31 जनवरी को ऋषिकेश में महिला की गोली मारकर हत्या, 2 फरवरी को देहरादून में युवती की गला रेतकर हत्या की घटनाएं हुई हैं।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।
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