गर्म हो रहा गंगाजल, हालात और बिगड़े तो नदी में लू चलेगी; क्या है समाधान?
Ganga Water is Warming: गंगा का पानी लगातार गर्म हो रहा है। वैज्ञानिकों के ताजा शोध में यह जानकारी सामने आई है। 2009 से 2025 के बीच पानी का औसत तापमान करीब 1.88 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है।

Ganga Water is Warming: गंगा में बढ़ती गर्मी व घटती ऑक्सीजन चिंता का विषय बन गई है। इससे गंगा के पारिस्थितिकी तंत्र, जलीय जीवन और इस पर निर्भर करोड़ों लोगों की आजीविका पर खतरा बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन, कम बारिश, घटता जल प्रवाह, नदी किनारे हरियाली की कमी, ग्लेशियरों में सिकुड़न इसके प्रमुख कारण हैं।
आईआईआईटी हैदराबाद के हाइड्रोक्लाइमेटिक रिसर्च ग्रुप और कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के शोध के अनुसार, गंगा के मध्य प्रवाह क्षेत्र में 2009 से 2025 के बीच पानी का औसत तापमान करीब 1.88 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है। इससे पहले इस क्षेत्र में पारा बढ़ने की वार्षिक औसत दर 0.9 डिग्री सेल्सियस थी। आईआईआईटी हैदराबाद की वैज्ञानिक डॉ. रेहाना शैक ने जानकारी देते हुए बताया कि तापमान में एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने पर पानी में ऑक्सीजन घुलने का स्तर 2.3 प्रतिशत तक घट सकता है। यह ऑक्सीजन मछलियों, जलीय कीटों और बाकी जीवों के लिए जीवनदायी होती है।
आजीविका पर असर
वैज्ञानिकों का कहना है कि गंगा के पानी का तापमान बढ़ने से जैव विविधता, कृषि, पेयजल उपलब्धता और मत्स्य पालन पर असर पड़ेगा। पत्रिका साइंस एडवांसेज में प्रकाशित इस शोध के मुताबिक, बीते चार दशकों में दुनिया की 78.8% नदियों में ऑक्सीजन स्तर घटा है।
क्या हैं समाधान?
इस संकट से निपटने को नदी किनारे हरित पट्टी का विकास, प्राकृतिक जल प्रवाह बनाए रखना, प्रदूषण कम करना जरूरी है। वैज्ञानिकों के अनुसार, गंगा को प्रदूषण से ही नहीं, बल्कि बढ़ती गर्मी से भी बचाने की जरूरत है।
क्या है नदी की ‘लू’?
जब नदी का पानी लगातार कई दिनों तक सामान्य से अधिक गर्म रहता है तो इसे ‘रिवराइन हीटवेव’ या नदी में पड़ने वाली ‘लू’ कहा जाता है। वैज्ञानिक अध्ययन में चेतावनी दी गई कि यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन मौजूदा गति से जारी रहा तो 2090 तक गंगा के आधे से अधिक हिस्से में ‘लू’ की घटनाएं काफी बढ़ सकती हैं।
उत्तराखंड में 35 साल बाद हिमालयन रैली
उत्तराखंड में 35 साल बाद अंतरराष्ट्रीय हिमालयन कार रैली का आयोजन हो रहा है। इस आयोजन से एडवेंचर स्पोर्ट्स के सेक्टर में उत्तराखंड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। कैबिनेट ने इसके लिए संस्था का चयन एकल स्रोत से किए जाने को मंजूरी दी।
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फीले इलाकों, ऊंचे दर्रों, सर्पीली पहाड़ी सड़कों पर पर्यटक रोमांच का अनुभव करेंगे। इसकी जिम्मेदारी टीम फायर फॉक्स को सौंपी गई है। कैबिनेट ने एकल स्रोत से इस कंपनी को जिम्मेदारी देने की मंजूरी दी गई। सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि रैली एडवेंचर प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी। रैली में 125 से अधिक लोग हिस्सा लेंगे।
1990 तक हुआ आयोजन
उत्तराखंड में 1980 से 1990 के बीच इस रैली के 11 आयोजन हुए। इन आयोजनों से भारत को वैश्विक मोटर स्पोर्ट्स के नक्शे में एक नई पहचान मिली थी।


