Hindi Newsउत्तराखंड न्यूज़Ganga Being Polluted by Its Tributary Rivers Report Rings Alarm Bells
गंगा का ‘आंचल’ मैला कर रहीं उसकी सहायक नदियां, रिपोर्ट में खतरे की घंटी

गंगा का ‘आंचल’ मैला कर रहीं उसकी सहायक नदियां, रिपोर्ट में खतरे की घंटी

संक्षेप:

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट कहती है कि उत्तराखंड में गंगा की 12 सहायक नदियां गंगा को मैला कर रही हैं। रिपोर्ट बेहद चिंता पैदा करने वाली है। रिपोर्ट में देहरादून की सुसवा, सबसे ज्यादा प्रदूषित नदी की श्रेणी में है।

Feb 10, 2026 08:33 am ISTGaurav Kala ओम प्रकाश सती, देहरादून
share Share
Follow Us on

गंगा में सीधे या किसी और नदी के साथ मिलकर मिलने वाली उत्तराखंड की नदियां उसे प्रदूषित कर रही हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने अपनी रिपोर्ट में राज्य की 12 नदियों को प्रदूषित बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, नदियों में प्रदूषण की मुख्य वजह उनमें, सीवर और उद्योगों की गंदगी जाना बताया गया। इससे इनकी जैव-रासायनिक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) का स्तर निर्धारित मानकों से कहीं अधिक पाया गया। सीपीसीबी ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने को वर्किंग प्लान बनाने को कहा है।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

सीपीसीबी ने बताया है कि बिना उपचारित सीवेज (मल-जल) और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला अपशिष्ट नदियों के प्रदूषण का प्रमुख कारण बना है। कई शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में मल-जल सीधे नदियों में बहाया जा रहा है, जबकि कई जगह सीवेज शोधन संयंत्र (एसटीपी) व औद्योगिक अपशिष्ट शोधन संयंत्र (ईटीपी) मानकों के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं। साॅलिड वेस्ट का सही निस्तारण न होना भी एक बड़ी वजह है। रिपोर्ट में दून की सुसवा, सबसे ज्यादा प्रदूषित नदी की श्रेणी में है। इसमें मुख्य रूप से रिस्पना और बिंदाल नदियों के जरिए शहरभर का गंदा पानी और सीवर सीधे जा रहा है। यूएसनगर की बाणगंगा, भेला, ढेला, कल्याणी नदियों को भी सबसे प्रदूषित की श्रेणी में रखा गया है।

सर्वाधिक प्रदूषित

उत्तराखंड में सर्वाधिक प्रदूषित नदियों में सुसवा, भेला, ढेला और कल्याणी नदी शामिल हैं। देहरादून के मोथरोवाला क्षेत्र में सुसवा नदी घरेलू सीवर और नालों का गंदा पानी सीधे मिलने से बुरी तरह प्रदूषित हो चुकी है। वहीं काशीपुर से लोहिया पुल तक भेला नदी और ठाकुरद्वारा–अलीगंज मार्ग से आदमपुर तक ढेला नदी में औद्योगिक अपशिष्ट, शहरी कचरा और कृषि रसायनों के कारण जल गुणवत्ता बेहद खराब हो गई है। इसके अलावा पंतनगर औद्योगिक क्षेत्र के आसपास कल्याणी नदी पर फैक्ट्रियों से निकलने वाले रसायनयुक्त पानी का भारी दबाव है, जिससे इन नदियों का पारिस्थितिक संतुलन गंभीर खतरे में पड़ गया है।

मध्यम प्रदूषित

उत्तराखंड में मध्यम प्रदूषित नदियों में टोंस, किच्छा, कोसी और पिलखार नदी शामिल हैं। विकासनगर के हरिपुर क्षेत्र में टोंस नदी तथा किच्छा से पुल बट्टा तक किच्छा नदी घरेलू सीवर, स्थानीय नालों और कृषि अपशिष्ट के कारण मध्यम स्तर का प्रदूषण झेल रही हैं। इसी तरह बाजपुर मार्ग पुल से डड्याल पुल तक कोसी नदी पर शहरी विस्तार और औद्योगिक गतिविधियों का असर दिखाई देता है, जबकि बिलासपुर से रामपुर भोट तक पिलखार नदी में कृषि रसायन और आबादी से निकलने वाला अपशिष्ट मिल रहा है, जिससे इन नदियों की जल गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।

कम प्रदूषित, लेकिन चिंताजनक

उत्तराखंड में कम प्रदूषित नदियों में रामगंगा और यमुना नदी शामिल हैं। कालागढ़ बैराज से बिजनौर तक रामगंगा नदी अभी अपेक्षाकृत कम प्रदूषित है, लेकिन बढ़ते शहरीकरण, औद्योगिक गतिविधियों और मानवीय हस्तक्षेप के कारण इसके जल की गुणवत्ता पर धीरे-धीरे दबाव बढ़ रहा है। वहीं डाकपत्थर क्षेत्र में यमुना नदी फिलहाल काफी हद तक स्वच्छ मानी जाती है, परंतु पर्यटन, आबादी और विकास गतिविधियों में तेजी आने से भविष्य में इसके प्रदूषण का खतरा बना हुआ है, जिसे देखते हुए समय रहते संरक्षण के ठोस कदम उठाना जरूरी है।

कुछ एसटीपी मानकों पर खरे

हाल में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदेश में चल रहे 70 एसटीपी से शोधन के बाद निकलने वाले जल की सैंपलिंग की थी, जिनमें से 10 का पानी प्रदूषित मिला। जबकि बाकियों का मानक के आसपास था। केवल कुछ एसटीपी का ही मानकों पर खरा उतरा।

सीपीसीबी ने ये सुझाव दिए

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए कई अहम सुझाव दिए हैं। बोर्ड का कहना है कि घरेलू मल-जल को सीधे नदियों में जाने से रोका जाए, इसके लिए शोधन संयंत्रों की क्षमता बढ़ाकर उनकी नियमित और सख्त निगरानी की जाए। साथ ही औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सीपीसीबी ने यह भी सुझाव दिया है कि नदी तटों से अतिक्रमण हटाकर वहां हरित क्षेत्र विकसित किए जाएं, ताकि नदियों के प्राकृतिक प्रवाह और पर्यावरणीय संतुलन को सुरक्षित रखा जा सके।

Gaurav Kala

लेखक के बारे में

Gaurav Kala

गौरव काला: वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम सदस्य

संक्षिप्त विवरण: गौरव काला पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। वह विशेष रूप से हिमालयी राज्य उत्तराखंड के अलावा, दिल्ली-एनसीआर, मध्यप्रदेश, झारखंड समेत कई हिंदी बेल्ट के राज्यों की खबरें कवर कर रहे हैं।


विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: गौरव काला का भारतीय डिजिटल मीडिया जगत में एक दशक से अधिक का अनुभव है। वह वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में, वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्टेट टीम सेक्शन का हिस्सा हैं। पिछले पांच वर्षों से वह पहले होम टीम का हिस्सा रहे और अब बड़ी बखूबी से स्टेट टीम में अपनी जिम्मेदारी को निभा रहे हैं। उन्हें डिजिटल पाठकों की पसंद और बदलती प्रवृत्तियों (Trends) को समझने में विशिष्ट महारत हासिल है। गौरव का करियर प्रिंट मीडिया से शुरू होकर टीवी जगत और डिजिटल मीडिया तक फैला हुआ है। यही वजह है कि उनकी खबरों में गहराई और सटीकता की झलक दिखती है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि और रिपोर्टिंग: गौरव मॉस कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं और यही उनकी सबसे बड़ी विशेषता है। पहले बी. ए. इन मॉस कम्यूनिकेशन और फिर आधुनिक पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन होने के कारण उनके पास खबरों की ठोस समझ है। 2011 में दैनिक जनवाणी अखबार में क्राइम रिपोर्टिंग से पत्रकारिता शुरू करने के बाद उन्होंने ईटीवी भारत में बतौर एंकर और स्क्रिप्ट राइटर पर तौर पर काम किया। 2015 में डिजिटल पत्रकारिता में एंट्री लेते हुए अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे संस्थानों में काम किया। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय खबरों को भी कवर किया, बल्कि आकर्षक लेखनी से पाठकों के बीच लोकप्रियता बनाई।


सितंबर 2021 में गौरव लाइव हिन्दुस्तान की नेशनल टीम के साथ जुड़े। तब से वह न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय, वायरल समाचार और मौसम संबंधी खबरों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, बल्कि राजनीतिक, रिसर्च बेस स्टोरीज भी कवर कर रहे हैं। अपनी मजबूत लेखनी के दम पर वह खबरों को आकर्षक नए कलेवर के साथ आम जनता तक पहुंचा रहे हैं।


डिजिटल ट्रेंड्स के साथ रिपोर्टिंग: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बदलते ट्रेंड्स को समझना गौरव की बड़ी ताकत है। वायरल खबरों, सोशल मीडिया ट्रेंड्स और इंटरनेट कल्चर से जुड़े विषयों को वह तथ्यात्मक जांच और संतुलित प्रस्तुति के साथ सामने रखते हैं। उनकी यही क्षमता उन्हें क्लिक-बेस्ड नहीं, बल्कि कंटेंट-बेस्ड पत्रकार बनाती है। इसके अलावा वह राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीति से जुड़े मुद्दों को तथ्यात्मक गहराई और संतुलित दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करते हैं।


पत्रकारिता का उद्देश्य: गौरव के लिए पत्रकारिता केवल खबर देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्य और जनहित को प्राथमिकता देते हुए पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना है। वह अपनी लेखनी से सत्ता, समाज और आम जनता के बीच एक मजबूत और भरोसेमंद सेतु बनाने में विश्वास रखते हैं।


विशेषज्ञता (Areas of Expertise):

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचार
वायरल और ट्रेंडिंग कंटेंट
राजनीतिक और रिसर्च-आधारित स्टोरीज
हेडलाइन और न्यूज़ प्रेजेंटेशन

और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।