इजरायल तक पहाड़ी टोपी, अमेरिका में उत्तराखंडी चावल; मोदी के दौरों से कितना बदला उत्तराखंड

Gaurav Kala चंद्रशेखर बुड़ाकोटी, देहरादून, हिन्दुस्तान
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प्रधानमंत्री मोदी का उत्तराखंड दौरा हर बार पर्यटन, विशेषकर धार्मिक पर्यटन के लिए संजीवनी साबित हुआ है। उनकी यात्राओं ने न केवल विकास की रफ्तार को गति दी, बल्कि आध्यात्मिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई मजबूती भी प्रदान की है। 

इजरायल तक पहाड़ी टोपी, अमेरिका में उत्तराखंडी चावल; मोदी के दौरों से कितना बदला उत्तराखंड

PM Modi in Dehradun: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस-वे को देश को समर्पित करने के लिए मंगलवार को देवभूमि में हैं। पीएम मोदी का आज 28वीं बार उत्तराखंड दौरा है। इस एक्सप्रेस-वे की बदौलत प्रदेश की राजधानी देहरादून और देश की राजधानी दिल्ली के बीच न सिर्फ आवाजाही सुगम होगी बल्कि समय में भी उल्लेखनीय बचत होगी। यह एक्सप्रेस-वे कनेक्टिविटी को नई गति देते हुए उत्तराखंड के आर्थिक, पर्यटन और औद्योगिक विकास को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उत्तराखंड के बदलाव के लिए मील का पत्थर रखने का यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी जब-जब प्रधानमंत्री मोदी उत्तराखंड आए, हर बार उन्होंने देवभूमि के साथ अपने आध्यात्मिक और भावनात्मक लगाव का परिचय दिया। साथ ही हर बार कोई न कोई ऐसी सौगात-सुझाव दे गए जिसने उत्तराखंड के विकास के किसी न किसी सेक्टर की मजबूत बुनियाद रख दी।

इजरायल तक पहुंची पहाड़ी टोपी, अमेरिका में महके उत्तराखंडी चावल

देवभूमि उत्तराखंड की संस्कृति और उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार अहम भूमिका निभा रहे हैं। पारंपरिक पहाड़ी टोपी से लेकर यहां के जैविक उत्पादों तक, उन्होंने हर मंच पर उत्तराखंड की विशिष्टता को प्रमुखता से उभारा है। 26 जनवरी 2022 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने पहली बार पारंपरिक साफे की जगह उत्तराखंडी पहाड़ी काली टोपी पहनकर सभी का ध्यान खींचा। इस टोपी पर अंकित ब्रह्मकमल न केवल उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान है, बल्कि इसका वैश्विक जगत से भी परिचय हुआ। इसके बाद प्रधानमंत्री ने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस टोपी को पहनकर उत्तराखंड के प्रति अपने विशेष लगाव को प्रदर्शित किया।

हालिया विदेश दौरों में भी यह सिलसिला जारी रहा। इजराइल यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री का पहाड़ी टोपी में दिखना खासा चर्चा में रहा, जिससे राज्य की सांस्कृतिक विरासत समंदर पार तक पहुंची। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति को उत्तराखंड के लंबे चावल भेंट कर उन्होंने यहां के कृषि उत्पादों की खुशबू को वैश्विक स्तर तक पहुंचाया। प्रधानमंत्री का उत्तराखंड से जुड़ाव केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि निरंतर सक्रिय रहा है। बीते वर्षों में उन्होंने चार धाम, आदि कैलाश, जागेश्वर धाम और जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क जैसे प्रमुख स्थलों के माध्यम से राज्य की पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

उपहारों के जरिए भी मिली पहचान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रधानमंत्री की मुलाकातें भी राज्य के उत्पादों के प्रचार का माध्यम बन रही हैं। विभिन्न अवसरों पर मुख्यमंत्री द्वारा भेंट किए गए उत्तराखंडी उत्पादों ने राष्ट्रीय स्तर पर खास पहचान बनाई है। इनमें मुनस्यारी की शॉल, पुरोला के लाल चावल, अल्मोड़ा के तांबे के बर्तन, पहाड़ी शहद और बदरी गाय का घी प्रमुख हैं। साथ ही, प्रदेश के धार्मिक स्थलों-जागेश्वर धाम, धारी देवी, सुरकंडा देवी और हनोल मंदिर की प्रतिकृतियां भी भेंट की गईं। चार जुलाई 2023 को बाबा नीब करौरी की प्रतिकृति भेंट किया जाना भी विशेष रहा, जिसने आध्यात्मिक विरासत को राष्ट्रीय विमर्श में स्थान दिलाया।

ब्रांड उत्तराखंड को मिली नई उड़ान

प्रधानमंत्री के प्रयासों से उत्तराखंड अब केवल पर्यटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सांस्कृतिक और जैविक उत्पादों के वैश्विक ब्रांड के रूप में उभर रहा है। पहाड़ी टोपी से लेकर यहां के चावल और शॉल तक, हर पहचान अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है।

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