उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का निधन, वाजपेयी सरकार में रहे केंद्रीय मंत्री
Bhuwan Chandra Khanduri Passed Away: उत्तराखंड के पूर्व सीएम भुवन चंद्र खंडूरी का निधन हो गया है। उन्होंने 92 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। वे दो महीने से देहरादून मैक्स अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती थे।

Bhuwan Chandra Khanduri Passed Away: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल (रिटायर ) भुवन चंद्र खंडूरी का निधन हो गया। वह 92 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। खंडूरी अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे।
खंडूरी पिछले दो महीने से मैक्स अस्पताल में भर्ती थे जहां उनका इलाज चल रहा था। खंडूरी के निधन की खबर से राज्य में शोक की लहर है। मेजर जनरल खंडूरी अनुशासित कार्यशैली और कड़क छवि के लिए जाने जाते थे।
दो बार उत्तराखंड के सीएम रहे
वह दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे। राजनीति में आने से पहले उन्होंने भारतीय सेना की कोर ऑफ इंजीनियर्स में सेवाएं दीं और 1982 में उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया था।
वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री के रूप में उन्होंने 'स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना' को धरातल पर उतारने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। बीसी खंडूरी की बेटी और विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी ने अपने पिता के निधन की पुष्टि की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
सीएम धामी ने जताया दुख
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खंडूरी के निधन पर शोक जताया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘अत्यंत दुखद समाचार प्राप्त हुआ। भारतीय सेना में सेवा के दौरान श्री खंडूरी जी ने राष्ट्रसेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सैन्य जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उनका पूरा व्यक्तित्व देशहित और जनसेवा के प्रति समर्पित रहा।’
ईमानदारी की मिसाल
धामी ने आगे लिखा, “अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने उत्तराखंड के विकास, सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई। एक जननेता के रूप में उन्होंने राज्य की प्रगति के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए और अपनी सादगी, स्पष्टवादिता तथा कार्यकुशलता से जनता के दिलों में विशेष स्थान बनाया। उनका निधन केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी अपूरणीय क्षति है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोक संतप्त परिवार को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।”
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