अब UCC की धाराओं में सीधे मुकदमा, कैसे हरिद्वार में हलाला केस बना नजीर; पीड़िता का दर्द छलका

देहरादून/हरिद्वार
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बीते दिनों हरिद्वार पुलिस ने हलाला केस में अदालत के समक्ष चार्जशीट दायर की। इस केस में ऐसी तकनीकी समस्या रही, जो आने वाले समय में नजीर बनेगी। अब यूसीसी की धाराओं में सीधे मुकदमें दर्ज होंगे।

अब UCC की धाराओं में सीधे मुकदमा, कैसे हरिद्वार में हलाला केस बना नजीर; पीड़िता का दर्द छलका

उत्तराखंड में अब समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के तहत मुकदमे सीधे दर्ज किए जा सकेंगे। अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम (सीसीटीएनएस) पर यूसीसी का पूरा ऐक्ट अपडेट कर दिया गया है। इसके बाद अब प्राथमिकी दर्ज करते समय यूसीसी की धाराएं जोड़ी जा सकेंगी।

हरिद्वार के बुग्गावाला थाने में दर्ज हलाला और तीन तलाक मामले में तकनीकी समस्या आई थी। महिला का मामला चार अप्रैल को दर्ज किया गया था, लेकिन उस समय सीसीटीएनएस पर यूसीसी की धाराएं अपडेट नहीं थीं। लिहाजा, मुकदमा दर्ज किए जाने समय दहेज प्रतिषेध अधिनियम, मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों की सुरक्षा) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराएं ही लगाई जा सकीं।

चार्जशीट में जोड़ी गईं यूसीसी की धाराएं

यह मामला शासन तक पहुंचने के बाद समान नागरिक संहिता की सभी धाराओं को सीसीटीएनएस पोर्टल पर अपडेट किया गया। इसके बाद पुलिस ने जांच-पड़ताल पूरी करते हुए ऑनलाइन चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट दाखिल करते समय आरोपियों के खिलाफ यूसीसी की धारा 32(1)(2) और धारा 32(1)(3) को जोड़ा गया।

रुड़की का केस नजीर

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने से पीड़ित महिलाओं में नई उम्मीद जगी है। वर्षों से शोषण और सामाजिक दबाव झेल रही एक पीड़िता ने इसको ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि हलाला जैसी साजिशें रचने वाले भी सोचने को मजबूर होंगे।

पीड़िता ने जताया आभार

पीड़िता ने कहा कि प्रदेश में यूसीसी लागू होना उनके जैसी हजारों महिलाओं के लिए राहत की किरण है। उन्होंने भावुक होकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार जताकर कहा कि यह साहसिक और निर्णायक कदम है, जिससे महिलाओं को कानूनी सुरक्षा का कवच मिला है। उन्होंने कहा कि अब पीड़ित महिलाओं को न्याय के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उन्होंने यूसीसी से जुड़े सदस्य, एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर और एसओ अंकुर शर्मा का भी धन्यवाद दिया है। उन्होंने बताया कि शिकायत पर तुरंत मुकदमा दर्ज किया गया और एक माह के भीतर ही चार्जशीट दाखिल कर दी गई।

उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य

उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां यूसीसी लागू की गई। 2022 के चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूसीसी लागू करने का वादा किया था। सत्ता में लौटने के बाद 27 मई 2022 को विशेषज्ञ समिति बनाई, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर विधानसभा में विधेयक हुआ। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हुआ।

4.39 लाख शादी पंजीकृत

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यूसीसी पोर्टल पर अब तक 4.39 लाख विवाह पंजीकरण हो चुके हैं। विवाह विच्छेद के 351 मामले दर्ज किए गए। लिव-इन के 84 मामले भी पंजीकृत हैं। चार आवेदन ऐसे हैं, जिनमें लिव-इन रिश्ते को खत्म करने की जानकारी दर्ज कराई गई है।

पुलिस मुख्यालय प्रवक्ता सुनील मीणा का कहना है कि शुरुआती दौर में यूसीसी की कुछ धाराएं सीसीटीएनएस पर उपलब्ध नहीं थीं। अब पूरा ऐक्ट अपडेट हो चुका है। भविष्य में यूसीसी के तहत दर्ज होने वाले मामलों में प्राथमिकी स्तर पर ही धाराएं लगाई जा सकेंगी।

Gaurav Kala

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