ब्लड बैंक की आड़ में खून का खेल: फर्जी कैंप लगाने वाले गिरोह का भंड़ाफोड़, 15000 में बेचते थे एक यूनिट
हरिद्वार में फर्जी कैंप लगाकर एक गिरोह बिजनौर में ब्लड की सप्लाई करता पकड़ा गया है। एक यूनिट का रेट 12 हजार से 15 हजार फिक्स था। ये हरिद्वार में एक ब्लड बैंक की आड़ में खून बेचने का गिरोह चला रहे थे।

महेश्वर सिंह, हरिद्वार
हरिद्वार के लक्सर में अवैध रूप से रक्तदान शिविर लगाकर रक्त एकत्र कर बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी बिजनौर क्षेत्र में 12 से 15 हजार रुपये प्रति पैकेट में यह रक्त बेचते थे।
सीओ देवेंद्र नेगी ने बताया कि 16 अगस्त को सूचना मिली थी कि कुछ लोग गांव-देहात में बिना अनुमति शिविर लगाकर लोगों से रक्त एकत्र कर रहे हैं। आरोप है कि एकत्र रक्त को अधिकृत ब्लड बैंक में जमा कराने के बजाय दूसरे राज्यों में बेचने की तैयारी थी। सूचना के बाद सुल्तानपुर चौकी प्रभारी बीरेंद्र सिंह नेगी और भिक्कमपुर चौकी प्रभारी यशवीर सिंह नेगी ने टीम के साथ चेकिंग शुरू की।
कार की तलाश के दौरान ब्लड से भरे 27 बैग बरामद हुए
पुलिस ने रविवार देररात अलावलपुर तिराहे पर एक कार को रोककर तलाशी ली। कार की डिग्गी में रखे आइस बॉक्स से रक्त से भरे 27 बैग बरामद हुए। रक्त संग्रह और जांच से संबंधित सामग्री भी मिली। दूसरी कार में चार डोनर चेयर, डोनर फॉर्म बुक, वेट मशीन, अमृत चैरिटेबल ब्लड सेंटर के 28 प्रमाणपत्र, स्लाइड का डिब्बा और हाथ बांधने वाली चार बेल्ट समेत अन्य सामान बरामद हुआ। पुलिस ने आरोपी अनित सैनी निवासी फतवा लक्सर, शुभम निवासी माड़ाबेला खानपुर, दुष्यंत कुमार निवासी बिजनौर, कावेन्द्र निवासी मुरादाबाद और दया सिंह निवासी संभल को गिरफ्तार कर लिया है।
रक्तदाता बरतें सावधानी
रक्तदान करने से पहले यह जरूर पता करें कि शिविर किस अधिकृत ब्लड बैंक से जुड़ा है। रक्त कहां भेजा जाएगा और उसकी जांच किस केंद्र पर होगी, इसकी जानकारी लें। केवल किसी संस्था के नाम या मरीजों की मदद के नाम पर आयोजित शिविर में बिना जानकारी के रक्तदान न करें। रक्त बैंक चलाने के लिए लाइसेंस अनिवार्य है और बिना लाइसेंस रक्त बैंक संचालित करना कानूनन अपराध है।
ब्लड सेंटर की शाखा की आड़ में खेल
लक्सर में अमृत चैरिटेबल ब्लड सेंटर की एक शाखा होने की बात सामने आई है। रक्तदाताओं को इसी सेंटर के प्रमाण पत्र दिए जाते थे। पुलिस को आशंका है कि इसी नाम और पहचान की आड़ में आरोपियों ने रक्त एकत्र किया। रक्त की खरीद-फरोख्त और संबंधित संस्थाओं की भूमिका को लेकर पुलिस जांच कर रही है। पुलिस पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अब तक कितने शिविर लगाए गए, कितना रक्त एकत्र किया गया और इस नेटवर्क में कितने लोग जुड़े हैं।
एसपी देहात शेखर चंद्र सुयाल ने कहा कि पुलिस ने अवैध रूप से रक्त एकत्र करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। प्रथम दृष्टयता महंगे दर पर बिजनौर क्षेत्र में खून बेचने की बात सामने आई है। यह गिरोह ग्रामीण क्षेत्र में केला, सेब और प्रमाणपत्र के झांसे में लोगों से शिविर लगाकर खून एकत्रित किए हैं। इस पूरे मामले की जांच पड़ताल की जा रही है।
सात शिविरों में 250 लोगों ने दिया खून
लक्सर। पुलिस की जांच में सामने आया है कि गिरोह ने लक्सर क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों पर सात शिविर लगाकर ढाई सौ से ज्यादा लोगों ने करीब 270 यूनिट रक्त एकत्र किया। आरोप है कि शिविरों में रक्तदाताओं को प्रमाणपत्र देकर रक्तदान के लिए प्रेरित किया गया। इसके बाद एकत्र रक्त को ऊंची कीमत में बेचने की तैयारी थी।
पुलिस के अनुसार आरोपी बिना आवश्यक अनुमति के शिविर आयोजित करते थे। शिविरों में लोगों को रक्तदान के फायदे बताए जाते थे और फल तथा प्रमाणपत्र देकर उन्हें रक्तदान के लिए प्रोत्साहित किया जाता था। कई लोगों ने इसे पुण्य का कार्य समझकर स्वेच्छा से रक्तदान किया। आरोप है कि एक यूनिट रक्त को करीब 12- 15 हजार रुपये में बिजनौर में बेचने की योजना थी। पूर्व में भी इन आरोपियों द्वारा बिजनौर क्षेत्र में रक्त बेचे जा चुके हैं। इसकी जांच पड़ताल पुलिस कर रही है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
दूसरे राज्य में खून बेचने की जांच के आदेश
ब्लड डोनेशन कैंप लगाकर दूसरे राज्य में खून बेचने का पर्दाफाश होने के मामले में केंद्रीय औषधि नियंत्रक ने लक्सर के अमृत चैरिटेबल ब्लड सेंटर की जांच के आदेश दे दिए हैं। राज्य व केंद्र की संयुक्त टीम इस प्रकरण की जांच करेंगी और उसके आधार पर लाइसेंस पर निर्णय लिया जाएगा।
लक्सर कोतवाली पुलिस ने सोमवार को फर्जी ब्लड कैंप लगाकर लोगों से खून लेने वाले गिरोह का किया पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस कार्रवाई के अलावा अब स्वास्थ्य विभाग व केंद्रीय औषधि विभाग ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। केंद्रीय औषधि नियंत्रक ने राज्य को इस मामले में संयुक्त जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। एफडीए के अपर आयुक्त ताजबर सिंह ने बताया कि केंद्रीय औषधि नियंत्रक के आदेश पर इस मामले की जांच कराई जा रही है।
विदित है कि केंद्र की ओर से कुछ महीने पूर्व ही ब्लड सेंटर को लाइसेंस मिला था और अब जांच के बाद केंद्रीय औषधि नियंत्रक लाइसेंस रद्द कर सकते हैं। इधर सोमवार को इस प्रकरण के सामने आने के बाद स्वास्थ्य महानिदेशालय में हडकंप मचा हुआ है और अब राज्य में लगने वाले ब्लड डोनेशन कैंप को लेकर आने वाले दिनों में एडवायजरी जारी हो सकती है।


