आबादी में घुसकर हाथियों का ‘बैचलर गैंग’ बढ़ा रहा खतरा, वैज्ञानिकों ने बताई वजह
वैज्ञानिकों की रिसर्च से पता चला है कि आबादी में घुसकर हाथियों का बैचलर गैंग मुसीबत बढ़ा रहा है। राजाजी और हरिद्वार वन प्रभाग के 475 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में किए गए अध्ययन में कुल 706 हाथियों का रिकॉर्ड तैयार किया गया।

उत्तराखंड में हाथियों के ‘बैचलर गैंग’ आबादी में उत्पात मचा रहे हैं, जो मानव वन्यजीव संघर्ष के लिए भी जिम्मेदार हो सकते हैं। राजाजी पार्क और हरिद्वार वन प्रभाग में पहली बार केवल नर हाथियों के झुंड मिले हैं। शोध में सामने आया कि बैचलर ग्रुप बनाने की प्रवृत्ति मुख्य रूप से वयस्क नर हाथियों में देखी गई। युवा और किशोर नर हाथी अधिकतर मादा तथा बच्चों वाले मिश्रित झुंडों में शामिल रहते हैं।
वैज्ञानिकों ने इनको बैचलर गैंग नाम दिया है। भारतीय वन्यजीव संस्थान के शोध में यह सामने आया है। भारतीय वन्यजीव संस्थान के शोध के अनुसार, राजाजी और हरिद्वार वन प्रभाग के 475 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में किए गए अध्ययन में कुल 706 हाथियों का रिकॉर्ड तैयार किया गया। इनमें 219 नर हाथी बैचलर गैंग में शामिल थे। शोध के दौरान नर हाथियों के व्यवहार, उनकी उम्र, आवास और सामाजिक संबंधों का विस्तृत विश्लेषण किया गया।
हाथियों के हमले में दंपती ने दम तोड़ा
सीधी, मध्य प्रदेश के सीधी जिले में जंगली हाथियों के झुंड के हमले में एक दंपती की मौत हो गई। यह घटना सोमवार तड़के करीब दो बजे गजरा ग्राम पंचायत के अंतर्गत चिंगी गांव में हुई। पुलिस के अनुसार, जंगली हाथियों के झुंड ने गांव में एक कच्चे मकान को घेर लिया और उसमें सो रहे 60 वर्षीय भैयालाल यादव तथा उनकी 58 वर्षीय पत्नी तिलिया यादव पर हमला कर दिया।
आबादी और संघर्ष वाले इलाकों में मिले ज्यादा झुंड
अध्ययन में यह भी सामने आया कि केवल नर हाथियों के समूह घास के मैदानों, झाड़ीदार इलाकों, कृषि क्षेत्रों और मानव आबादी के नजदीक अधिक दिखाई दिए। सुरक्षा, भोजन और आवास के साथ नए हाथियों को सिखाने के लिए ये बैचलर ग्रुप बनाए जा रहे हैं।
सुरक्षा, सीख और सुविधा के लिए बने ये नर समूह
विशेषज्ञों में अनुसार नर हाथियों के ये झुंड बनाने के पीछे सुरक्षा, सीख और सुविधा मुख्य कारण हो सकते हैं। उनके अनुसार हाथी सामाजिक प्राणी हैं, ऐसे में वो झुंड में सुरक्षित महसूस करते हैं। वहीं, झुंड में वयस्क हाथी छोटे हाथियों को सिखाते भी हैं। इसके अलावा उनको भोजन पानी आदि खोजने में भी झुंड में रहकर आसानी होती है।
रिपोर्ट- ओम प्रकाश सत
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