जल जीवन मिशन के बाद पीने के पानी से संक्रमण: बच्चे-महिलाएं ज्यादा शिकार; डर का माहौल
उत्तरकाशी के भटवाड़ी में पीने के पानी से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। जल जीवन मिशन के तहत नए स्रोत के पानी का इस्तेमाल करने के बाद चेहरों पर फोड़े-फुंसियां निकल रही हैं।

सुरेंद्र नौटियाल, उत्तरकाशी
उत्तरकाशी जिले के भटवाड़ी ब्लॉक के भंगेली गांव में लोग पेयजल संक्रमण की चपेट में आने से संकट में हैं। जल जीवन मिशन के तहत नए स्रोत के पानी का इस्तेमाल करने के बाद चेहरों पर फोड़े-फुंसियां निकल रही हैं। बच्चे और महिलाएं संक्रमण की ज्यादा शिकार हो रही हैं। तेजी से फैल रहे इस संक्रमण से ग्रामीण भयभीत हैं। ग्राम प्रधान की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लोगों का उपचार शुरू कर दिया है।
ग्राम प्रधान भंगेली संदीप ने रविवार को जिलाधिकारी को भेजे पत्र में बताया कि गांव में कुछ समय से बच्चों और महिलाओं के चेहरे पर छोटे-छोटे दाने निकल रहे हैं, जो बाद में गंभीर फोड़े-फुंसी का रूप ले रहे हैं और तेज जलन, खुजली, दर्द के साथ प्रभावित लोगों को बुखार आ रहा है। उन्होंने बताया कि बताया कि यह समस्या उस समय से सामने आई जब जल जीवन मिशन योजना के तहत नए जल स्रोत से गांव की पेयजल लाइन को जोड़ा गया। ग्रामीणों ने पेयजल संक्रमण का मुख्य कारण माना है। प्रधान ने पेयजल स्रोत की जांच की मांग की है, ताकि बीमारी के कारणों का पता लगाया जा सके।
स्वच्छता समिति की बैठक में उठा मामला
रविवार को भंगेली गांव में ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता व पोषण समिति की बैठक हुई। ग्रामीणों ने ग्रामीणों ने इस समस्या को पेयजल संक्रमण का कारण बताया। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में वर्तमान समय में संक्रमण से 20 से ज्यादा बच्चे और महिलाएं इस संक्रमण से ग्रसित है।
टीम ने स्वास्थ्य परीक्षण कर दवा दी
सीएमओ डा. श्याम विजय ने बताया कि भटवाड़ी स्वास्थ्य केंद्र की टीम भेजी गई थी। स्वास्थ्य टीम ने गांव में बच्चों और महिलाओं को संक्रमण से ग्रसित पाया। स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक दवाइयां दी गईं। ग्रामीणों को पानी को उबालकर पीने की सलाह दी गई।
ज्योलीकोट में 338 लोगों के स्वास्थ्य की जांच
नैनीताल। जलजनित रोगों की रोकथाम और प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी है। सीएमओ डॉ. रश्मि पंत के निर्देश पर रविवार को भी स्वास्थ्य टीमों ने विभिन्न क्षेत्रों में शिविर लगाकर और घर-घर जाकर 338 लोगों के स्वास्थ्य जांच की। इनमें 269 की जांच स्वास्थ्य शिविरों व घर-घर जाकर और 69 लोगों की जांच पीएचसी ज्योलीकोट में की।
जांच के दौरान 45 ब्लड सैंपल लिए, जबकि गंभीर लक्षण वाले तीन मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया गया। जरूरतमंदों को दवाओं के साथ जिंक, ओआरएस, क्लोरीन की गोलियां बांटी।
हरिनगर और सात नंबर में 77 टेस्ट किए
हरिनगर और सात नंबर क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 77 रैपिड टेस्ट किए और सभी टेस्ट नेगेटिव आए। डायरिया और पीलिया से बचाव के लिए आंगनबाड़ी केंद्र आड़ूखान और मनोरा में जागरुकता शिविर लगाए गए। लोगों को स्वच्छ पेयजल, व्यक्तिगत स्वच्छता, ओआरएस के इस्तेमाल और जलजनित रोगों से बचाव की जानकारी दी गई।
इन्होंने की मरीजों जांच
हल्द्वानी के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने पीएचसी ज्योलीकोट में ओपीडी सेवाएं दीं। चंदन हॉस्पिटल के एमडी फिजीशियन डॉ. हिमांशु कुमार, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सिद्धांत मेहता और सेंट्रल हॉस्पिटल के डॉ. सचिन चक्रवर्ती ने मरीजों की जांच की। आज सोमवार नीलकंठ हॉस्पिटल हल्द्वानी की वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. मेघा रखौलिया, डॉ. शाहिल समेत विशेषज्ञों की टीम ओपीडी करेगी। काउंसलिंग के लिए सीएचओ के माध्यम से टेली-मानस और ई-संजीवनी सेवाओं का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।


