
यादों में ही-मैन; जब धर्मेंद्र ने देहरादून के दर्शकों को अपने खर्चे पर पिलाई थी चाय
दून के भाजपा नेता अशोक वर्मा बताते हैं कि उस समय वे बहुत छोटे थे, लेकिन उनके पड़ोस के कई लोग शूटिंग देखने गए थे। भीड़ बढ़ने से तनाव के हालात बने और पुलिस लाठीचार्ज को तैयार थी। जब लोग घर लौटे रहे थे तो बताया कि धर्मेंद्र अपनी जेब से चाय पिलाते रहे।
उत्तराखंड की वादियों से धर्मेंद्र का रिश्ता सिर्फ फिल्मों की शूटिंग तक सीमित नहीं रहा। उनके व्यवहार और सादगी ने यहां के लोगों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी। इसका सबसे अनोखा उदाहरण 1969 में तब देखने को मिला, जब विकासनगर के ढालीपुर में फिल्म ‘आदमी और इंसान’ की शूटिंग के दौरान भीड़ काबू से बाहर हो गई।
सबको पिलाई अपने पैसे की चाय
शूटिंग देखने उमड़ी सैकड़ों की भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस असफल रही और हालात लाठीचार्ज तक पहुंचने लगे। ठीक इसी मौके पर धर्मेंद्र ने अपनी ‘हीमैन’ पहचान दिखाई। उन्होंने अपनी जेब से सैकड़ों दर्शकों के लिए चाय मंगवाकर सबको पिलाई, ताकि माहौल शांत हो सके। यह दृश्य आज भी स्थानीय लोगों के जेहन में ताजा है।
दून के भाजपा नेता अशोक वर्मा बताते हैं कि उस समय वे बहुत छोटे थे, लेकिन उनके पड़ोस के कई लोग शूटिंग देखने गए थे। भीड़ बढ़ने से तनाव के हालात बने और पुलिस लाठीचार्ज को तैयार थी। जब लोग घर लौटे रहे थे तो बताया कि धर्मेंद्र अपनी जेब से चाय पिलाते रहे। यही किस्सा कई वर्षों तक इलाके में चर्चा में रहा। संयुक्त नागरिक संगठन के महामंत्री सुशील त्यागी ने भी शोक जताया है।
डाकपत्थर बैराज में फिल्माया था गाना
साल 1969 में धर्मेंद्र और सायरा बानो की फिल्म ‘आदमी और इंसान’ की शूटिंग डाकपत्थर बैराज समेत आसपास के क्षेत्रों में हुई थी। डाकपत्थर बैराज में इस फिल्म के एक गाने को फिल्माया गया। जबकि कुछ शूटिंग तब निर्माणाधीन ढालीपुर पावर हाउस में हुई। फिल्म की पूरी यूनिट के ठहरने के लिए कालसी की कोटी काॅलोनी स्थित शीशमहल में व्यवस्था की गई थी। शूटिंग के दौरान तीन दिनों तक धर्मेंद्र अपनी यूनिट के साथ ही रुके थे। इसके बाद जितेंद्र और हेमा मालिनी जैसे नामचीन सितारे भी यहां फिल्मों की शूटिंग के लिए पहुंचे।
ऋषिकेश में फिल्माई गई थी ‘गंगा की लहरें’
फिल्म समीक्षक मनोज पंजानी बताते हैं कि धर्मेंद्र के व्यक्तित्व में जिंदादिली और प्रकृति के प्रति लगाव था। उन्होंने अपने करियर में कुछ प्रमुख फिल्मों की शूटिंग उत्तराखंड में की। ऋषिकेश में ‘गंगा की लहरें’ में काम किया, जिसमें वे सेकंड लीड थे। इसके बाद विकासनगर में ‘आदमी और इंसान’, और नैनीताल में ‘हुकूमत’ की शूटिंग हुई।
‘असल जिंदगी में भी बड़े दिलवाले थे धर्मेंद्र’
फिल्म समीक्षक मनोज पंजानी बताते हैं कि धर्मेंद्र को फिल्म जगत में एक तस्वीर के आधार पर चुना गया था, ऐसी तस्वीर जिसने आगे चलकर भारतीय सिनेमा को उसका सबसे लोकप्रिय नायक दिया। ढालीपुर की घटना की तरह धर्मेंद्र के अनेक व्यवहार बताते हैं कि वे सिर्फ पर्दे के सितारे नहीं, बल्कि असल जिंदगी में भी बड़े दिल वाले इंसान थे।

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