Hindi Newsउत्तराखंड न्यूज़Despite her mother being nominee, forest dept must take call on wife compassionate hiring: Uttarakhand High Court
सर्विस रिकॉर्ड में बीवी नहीं सास को बना दिया था नॉमिनी, HC पहुंच गया अनुकंपा नियुक्ति मामला

सर्विस रिकॉर्ड में बीवी नहीं सास को बना दिया था नॉमिनी, HC पहुंच गया अनुकंपा नियुक्ति मामला

संक्षेप:

उत्तराखंड में एक सरकारी कर्मचारी ने पत्नी से तनावपूर्ण संबंधों के कारण अपने सर्विस रिकॉर्ड में पत्नी की जगह सास का नाम ‘नॉमिनी’ के रूप में दर्ज कराया था। वन विभाग ने उस व्यक्ति की मौत के बाद इसी आधार पर उसकी विधवा पत्नी के अनुकंपा नियुक्ति के दावे को खारिज कर दिया। 

Sat, 1 Nov 2025 11:14 AMPraveen Sharma नैनीताल, भाषा
share Share
Follow Us on

उत्तराखंड हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए एक अनोखा मामला आया, जिसमें एक व्यक्ति ने पत्नी से तनावपूर्ण संबंधों के कारण अपने सर्विस रिकॉर्ड में पत्नी की जगह सास का नाम ‘नॉमिनी’ के रूप में दर्ज कराया था। इसी आधार पर उस व्यक्ति की मौत के बाद वन विभाग ने उसकी विधवा पत्नी के अनुकंपा नियुक्ति के दावे को खारिज कर दिया।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

विधवा महिला ने वन विभाग के इस निर्णय को चुनौती देते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जस्टिस मनोज कुमार तिवारी की सिंगल जज बेंच ने महिला की ओर दायर याचिका पर सुनवाई की।

बेंच ने वन विभाग को निर्देश दिया कि चूंकि विभाग मृत कर्मचारी की सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) की एक राशि उसकी विधवा को जारी कर चुका है, जिससे याचिकाकर्ता को कर्मचारी की पत्नी के रूप में मान्यता मिल चुकी है, इसलिए अब विभाग को कानून के अनुसार तीन महीने के भीतर अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर निर्णय लेना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने कहा कि उसके पति किशन सिंह धपोला वन विभाग में चौकीदार के रूप में कार्यरत थे और सेवा में रहते हुए 2020 में उनका निधन हो गया था। याचिकाकर्ता ने विभाग से अनुकंपा नियुक्ति, पारिवारिक पेंशन और अन्य सेवा लाभों का अनुरोध किया था।

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता और उसके पति के बीच संबंध तनावपूर्ण थे और याचिकाकर्ता ने पूर्व में भरण-पोषण का मामला भी दायर किया था।

राज्य की ओर से यह भी कहा गया कि विभाग ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए उसके नाम पर विचार करने से इसलिए इनकार किया क्योंकि धपोला के सर्विस रिकॉर्ड में पत्नी की जगह सास का नाम ‘नॉमिनी’ के रूप में दर्ज था। हालांकि, राज्य सरकार ने यह स्वीकार किया कि जीपीएफ राशि का एक हिस्सा याचिकाकर्ता को जारी किया गया है।

हाईकोर्ट ने कहा कि जब विभाग ने जीपीएफ राशि का हिस्सा जारी कर याचिकाकर्ता को धपोला की पत्नी के रूप में मान्यता दी है, तो उसके अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर भी विचार किया जाना चाहिए।

अदालत ने वन विभाग को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता के अनुकंपा नियुक्ति के दावे की समीक्षा करे और तीन महीने के भीतर कानून के अनुसार उचित आदेश पारित करे।

Praveen Sharma

लेखक के बारे में

Praveen Sharma
प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।