ग्रीन कॉरिडोर से कंडी मार्ग की उम्मीद, गढ़वाल और कुमाऊं की दूरी 80 KM होगी कम

Gaurav Kala ओम प्रकाश सती, देहरादून, हिन्दुस्तान
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दिल्ली-देहरादून एक्स्प्रेसवे में 12 किलोमीटर लंबे ग्रीन कॉरिडोर से कंडी मार्ग की उम्मीद जगी है। इसके बनने से गढ़वाल और कुमाऊं मंडल की दूरी 80 किमी तक कम हो जाएगी।

ग्रीन कॉरिडोर से कंडी मार्ग की उम्मीद, गढ़वाल और कुमाऊं की दूरी 80 KM होगी कम

देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस-वे पर बना 12 किमी लंबा ग्रीन कॉरिडोर खुलने से उत्तराखंड की सबसे बड़ी उम्मीद जगी है। गढ़वाल और कुमाऊं को जोड़ने वाले ऐतिहासिक कंडी मार्ग के निर्माण का रास्ता भी इस कॉरिडोर के बाद खुल सकता है।

करीब 90 किमी लंबे कंडी मार्ग में भी सबसे बड़ा पेच कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के बीच से गुजरने वाले करीब 40 किलोमीटर लंबे वन्यजीव बहुल इलाके पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब कंडी मार्ग में भी मोरघट्टी और झिरना के पास ऐसे ही एलिवेटेड रोड से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर इस समस्या का समाधान संभव है। दरअसल करीब दो सौ साल से गढ़वाल के कोटद्वार से कुमाऊं के रामनगर के बीच आवाजाही के लिए कंडी मार्ग का इस्तेमाल होता रहा है।

लेकिन, कॉर्बेट नेशनल पार्क बनने के बाद से वन्यजीव संरक्षण के लिए खतरा बताकर इस पर पहले व्यावासायिक और फिर निजी वाहनों पर भी प्रतिबंध लगाए गए। यह मार्ग बाघ और हाथियों के मुख्य कॉरिडोर के रूप में विकसित होता गया। इस कारण वहां अब तक सड़क निर्माण की अनुमति नहीं मिल पायी। इसमें सबसे बड़ा पेच उत्तराखंड के मोरघट्टी और यूपी के बाड़गड़, उत्तराखंड के झिरना, यूपी के अमानगढ़ में वन्यजीव कॉरिडोर का है, जहां बाघ और हाथियों की बहुलता है। इसी वजह से वहां सड़क को मंजूरी नहीं मिल पा रही। इस बाबत कई बार प्रस्ताव खारिज किया जा चुका है।

कंडी रोड प्रोजेक्ट बना तो दो मंडलों की दूरी 80 किमी तक घट जाएगी

वन्यजीव विशेषज्ञों की मानें तो दून-दिल्ली ग्रीन कॉरिडोर खुलने के बाद अब काॅर्बेट में भी ऐसे ही एलिवेटेड रोड बनाकर इस सड़क का निर्माण हो सकता है। अधिकारियों की मानें तो इस प्रोजेक्ट के बनने से गढ़वाल और कुमाऊं की दूरी करीब 80 किलोमीटर कम हो जाएगी।

भीड़ जुटाने की थकान में कंडी मार्ग भूल गए: हरीश

पूर्व सीएम हरीश रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा पर प्रतिक्रिया दी है। रावत ने जहां एक ओर मोदी की ओर से सामूहिकता की बात करने का स्वागत किया, दूसरी ओर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर तीखा सियासी हमला बोला है।

रावत ने कहा कि देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस-वे की सौगात के बीच धामी आदि कैलास-बागेश्वर और दोनों मंडल जोड़ने वाले कंडी मार्ग की मांग करना भूल गए। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि वन्यजीवों की बाधा है, तो एलिवेटेड रोड बनाई जा सकती है। रावत ने तंज कसते हुए कहा कि शायद भीड़ जुटाने की थकान की वजह से मुख्यमंत्री ये प्रमुख मुद्दे उठाने से चूक गए। संविधान और संघीय ढांचे पर चिंता जताते हुए रावत ने कहा कि महिला आरक्षण पर पूरा विपक्ष साथ है, मगर परिसीमन के दौरान छोटे और दक्षिण भारतीय राज्यों के हितों का ध्यान रखना प्रधानमंत्री के नेतृत्व की असली परीक्षा होगी। उन्होंने दून में बढ़ते बॉटलनेक्स और जाम पर भी चिंता जताई और आरोप लगाया कि फ्लाईओवर निर्माण की गति थम गई है। उन्होंने एक्सप्रेस-वे को बाबा साहब को समर्पित न किए जाने पर निराशा जताई।

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