युवाओं का रील नहीं रियल लाइफ में जीने का संकल्प
या स्क्रीन टाइम कम करेंगे युवा, सेहत का रखेंगे ख्याल नए साल

या स्क्रीन टाइम कम करेंगे युवा, सेहत का रखेंगे ख्याल नए साल का संकल्प :: नए साल पर युवा बोले, रील से करेंगे तौबा, फोन का समय भी घटाएंगे पढ़ाई के लिए भी ऑनलाइन स्क्रीन पर नहीं, हार्ड कॉपी से पढ़ाई करेंगे हिन्दुस्तान विशेष देहरादून। कुमुद नौटियाल युवाओं की सबसे बड़ी चिंता उनका बढ़ता स्क्रीन टाइम और खराब दिनचर्या है। जिससे उनके शरीर और जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। नए साल के आगाज पर युवाओं ने इन्हें ठीक करने के संकल्प लिए हैं। युवाओं ने रील नहीं रियल लाइफ जीने का लिया संकल्प लिया, घंटों रील से तौबा करने की बात कही, तो ऑनलाइन पढ़ाई की हार्ड कॉपी का प्रयोग करने का भी प्रण लिया।
युवाओं ने ऐसे लिया संकल्प मेरा स्क्रीन टाइम लगभग दस घंटे से ज्यादा ही है। ऑफिस में अधिकतर काम स्क्रीन पर ही होता है। इसे कम करना मुमकिन नहीं है। इसलिए संकल्प लिया है कि सुबह के दो घंटे फोन से दूरी बनाकर रखूंगी। इससे स्क्रीन टाइम थोड़ा कम होगा। - नंदिना भट्ट, वीडियो एडिटर मैं कानून की पढ़ाई कर रही हूं, अधिकतर पढ़ाई के लिए फोन का प्रयोग करती हूं। मैंने संकल्प लिया है कि मैं पढ़ाई के लिए फोन का प्रयोग कम और हार्ड कॉपी का प्रयोग ज्यादा करूंगी। इसके साथ ही रोज व्यायाम के लिए समय निकालूंगी। -वैष्णवी दीपक, छात्रा एलएलबी इस साल मैंने फोन में रील देख समय बर्बाद करने की बजाए नोवल पढ़ने का संकल्प लिया है। एक रील की जगह मैं एक पेज भी नॉवेल का पढ़ूंगी तो मुझे कुछ नया सीखने को मिलेगा। मेरा स्क्रीन टाइम भी कम होगा। - प्रगति सयाना, निजी अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ मेरा फोन देखते हुए कब समय निकल जाता है, पता ही नहीं चलता है। इस बार मैंने संकल्प लिया है कि फोन में समय खराब करने की बजाए अपनी सेहत पर ध्यान दूंगी। घर पर ही एक्सरसाइज करूंगी साथ ही अपनी किसी हॉबी पर ध्यान दूंगी। -मानसी रौथान, निजी कंपनी में कार्यरत एक्सपर्ट बोले, हर काम ऑनलाइन, बढ़े स्क्रीन टाइम से सेहत खराब -- नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुशील ओझा कहते हैं कि आज के समय में सब कुछ हमारे फोन में आ जाता है। फोन से अब हम अलग नहीं रह सकते हैं। ऑनलाइन कार्यों में जहां आसानी होती है, वहीं स्क्रीन टाइम बढ़ने से इसके नुकसान भी है। आंखों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ रहा है और कई युवा आंखों की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। वहीं मनोचिकित्सक डॉ. निशा सिंगला का कहना है कि युवाओं को मोबाइल, रील की लत आलसी और मानसिक रोगी भी बना रही है। युवाओं का आधा वक्त तो इसी में बर्बाद हो रहा है। कई युवाओं को उनके परिजन लेकर आते हैं और उनकी काउंसिलिंग की जाती है। युवाओं को चाहिए कि वह आउटडोर गेम खेलने में समय दें, सेहत और परिवार का ख्याल रखें और उन्हें समय दें।

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