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देहरादूनवेल्हम गर्ल्स की दो पूर्व छात्राओं ने कोरोनाकाल में मदद के लिए शुरू किया भुल्ली प्रोजेक्ट, यह है खासियत

हिन्दुस्तान टीम,देहरादून। शैलेन्द्र सेमवालPublished By: Himanshu Kumar Lall
Tue, 01 Jun 2021 02:54 PM
वेल्हम गर्ल्स की दो पूर्व छात्राओं ने कोरोनाकाल में मदद के लिए शुरू किया भुल्ली प्रोजेक्ट, यह है खासियत

देहरादून के वेल्हम गर्ल्स की दो पूर्व छात्राओं अद्वैता काला व दिव्या बिंद्रा कपूर ने उत्तराखंड के गांवों में कोविड मेडिकल हेल्प पहुंचाने के लिए प्रोजेक्ट भुल्ली(सिस्टरहुड) शुरू किया है। फिल्म अभिनेता अनिल कपूर, सोनम कपूर, मंदिरा बेदी, प्रसून जोशी, पद्मा जोशी जैसी सेलीब्रेटियों ने भी ट्िवटर व इंस्टाग्राम पर अपील जारी कर उनकी मुहिम को सपोर्ट किया है। अद्वैता काला ने अंजाना अंजानी, कहानी जैसी फिल्में लिखी है, इसके अलावा वह ऑलमोस्ट सिंगल, ऑलमोस्ट देयर जैसे उपन्यास, बेवसीरीज इनलीगल की क्रिएटर  राइटर, मशहूर कॉलमिस्ट हैं। वहीं दिव्या, ओलम्पियन अभिनव बिंद्रा की छोटी बहन हैं। उनके प्रोजेक्ट भुल्ली को अभिनव बिंद्रा फाउंडेशन मदद कर रहा है।

अद्वैता व दिव्या ने ट्वीटर व इंस्टाग्राम में प्रोजेक्ट भुली के समर्थन पोस्ट लिखी है कि, उत्तराखंड के लोगों को कोरोनाकाल में इस समय मदद की बहुत जरूरत है। भौगालिक रुप से दूरस्थ इलाकों के इन छोटे गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं है। आगे बरसात शुरू होने को है ऐसे में पर्याप्त मेडिकल व राशन जैसी मदद उन तक पहुंचनी जरूरी है। मशहूर एक्ट्रेस मंदिरा बेदी व प्रसून जोशी ने समर्थन में लिखा है कि प्रोजेक्ट भुल्ली एक मानवीय पहल है। अभी तक उन्होंने टिहरी जिले के बैरोला, चाका, धारकोट व चोपड्यों गांव में सहायता पहुंचाई है। पौड़ी व सुमाड़ी में भी मदद पहुंचाई गई है। 

मां इंदु काला ने दी प्रेरणा
अद्वैता कोविड काल में मदद का इरादा किए हुए थी तो उनकी मां इंदु काला ने उन्हें उत्तराखंड में काम करने की सलाह दी। पिता आनंद प्रकाश काला वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी रहे हैं। बचपन देहरादून में बीता है। उनके नाना नानी कालीदास रोड में और दादा-दादी तेग बहादुर रोड में रहते थे। दून में चौथी के बाद उन्होंने नवी तक वेल्हम के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की। जहां उन्हें दिव्या बेस्ट फ्रेंड मिली।

पहली लहर में गुड़गांव में बांटा भोजन
अद्वैता ने कोरोना की पहली लहर में गुड़गांव में रोजाना सैकड़ों भोजन पैकेट बांटे। अभियान नौ माह तक चला था। उनकी और दिव्या की अक्सर पहाड़ों को लेकर चर्चा होती थी। इस बार जब पहाड़ों की स्थिति पर चर्चा हुई तो कुछ राहत कार्य शुरू करने पर बात बन गई।

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