उत्तराखंड में वक्फ बोर्ड के मदरसों में बाहरी छात्रों के दाखिलों पर रोक
उत्तराखंड के मदरसों में अब बाहरी राज्यों के नए छात्रों को दाखिला नहीं दिया जाएगा। वक्फ बोर्ड का कहना है कि उनकी प्राथमिकता स्थानीय बच्चों को आधुनिक शिक्षा देना है। पहले से दाखिला लिए छात्रों की तालीम जारी रहेगी। मदरसों को 'मॉडल मदरसे' के रूप में विकसित किया जा रहा है और मान्यता लेना अनिवार्य किया गया है।

देहरादून। उत्तराखंड के मदरसों को लेकर वक्फ बोर्ड ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने साफ कर दिया है कि बोर्ड के अधीन चलने वाले 117 मदरसों में अब बाहरी राज्यों के नए छात्रों को दाखिला नहीं दिया जाएगा। बोर्ड का तर्क है कि उनकी पहली प्राथमिकता उत्तराखंड के बच्चों को बेहतर और आधुनिक शिक्षा मुहैया कराना है। हिन्दुस्तान से खास बातचीत में शादाब शम्स ने कहा कि बोर्ड के पास न तो इतना समय है और न ही संसाधन कि वह बाहरी राज्यों से आने वाले हर बच्चे की पृष्ठभूमि की जांच करे। दो टूक कहा, हमारी पहली जिम्मेदारी उत्तराखंड के बच्चों को पढ़ाने की है। बाहर की जिम्मेदारी हम पर नहीं है। कौन कहां से आया है, इसकी जांच में समय बर्बाद करने के बजाय हम अपने प्रदेश के बच्चों के भविष्य पर ध्यान देंगे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन बाहरी छात्रों का दाखिला पहले से है, उनकी तालीम जारी रहेगी। हम मदरसों की तस्वीर बदलना चाहते हैं। उत्तराखंड के बच्चों को डॉक्टर-इंजीनियर बनाने का सपना है, इसलिए सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है।
मदरसे को 'मॉडल मदरसे' के रूप में विकसित करना
बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि अब प्रदेश के मदरसों को 'मॉडल मदरसे' के रूप में विकसित किया जा रहा है। अब सभी मदरसों को उत्तराखंड बोर्ड से मान्यता लेना अनिवार्य कर दिया गया है। देहरादून की मुस्लिम कॉलोनी स्थित मदरसे से इसकी शुरुआत हो चुकी है, जिसे कक्षा आठ तक अंग्रेजी माध्यम की मान्यता मिल गई है। बच्चों को उच्च स्तरीय आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ उलमाओं के सहयोग से दीनी तालीम (धार्मिक शिक्षा) का भी बेहतर निजाम दिया जाएगा। बोर्ड का कहना है कि जब तक व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो जाती, तब तक बाहरी बच्चों के नए एडमिशन पर रोक जारी रहेगी। स्थिति सुधरने पर ही भविष्य में इस पर पुनर्विचार किया जाएगा।
सरकार का कड़ा रुख
हाल ही में बिहार से आए बच्चों के मामले में सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सभी जिलों के डीएम को बाहरी बच्चों के सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही कई मदरसों की जांच भी शुरू कर दी गई है। एक जुलाई से उत्तराखंड मदरसा बोर्ड भंग हो जाएगा। इसके बाद मदरसों की शिक्षा व्यवस्था अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अधीन संचालित होगी।
सामान्य प्रश्न
लेखक के बारे में
Chand Mohammadशॉर्ट बायो : चांद मोहम्मद पिछले 11 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान में देहरादून यूनिट में बतौर वरिष्ठ संवाददाता कार्य कर रहे है।
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चांद मोहम्मद हिंदी पत्रकारिता में एक प्रतिष्ठित नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 11 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान अखबार में देहरादून में कार्यरत है और हेल्थ रिपोर्टिंग कर रहे है। वह पिछले आठ साल से हिंदुस्तान से जुड़े है। स्वास्थ्य रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों पर उनकी मजबूत पकड़ है।
करियर का सफर
चांद ने अपने करियर की शुरुआत 2015 में अमर अखबार देहरादून से की। जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2018 में उन्होंने हिंदुस्तान ज्वाइन किया। वर्तमान में वह हेल्थ, मेडिकल एजुकेशन, मौसम, मुस्लिम कम्युनिटी रिपोर्टिंग के अलावा देहरादून हिंदुस्तान में सह सिटी प्रभारी और सह अपराध संवाददाता की भूमिका में है।
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चांद बी कॉम और पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट है। वह यूपी के मुजफ्फरनगर के छोटे से गांव भंगेला से है। समाज के वंचित लोगों की आवाज उठाने, मरीजों की पीड़ा बयां करना उनका एक जज्बा बयां करता है। कोविड के दौरान उन्होंने पीड़ा बताती और सिस्टम पर प्रहार करती रिपोर्टिंग की। मेडिकल रिसर्च और हेल्थ से जुड़े विषयों पर उन्होंने काफी काम किया है। लगातार जागरूकता परक और रिसर्च बेस्ड स्टोरी हेल्थ और मौसम पर करते है।
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