क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल की जयंती पर याद किए गए बलिदान

हिन्दुस्तान, देहरादून
Follow us on Google News
share

देहरादून में नेताजी संघर्ष समिति ने पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई। वक्ताओं ने उनके जीवन और देश के प्रति समर्पण को याद किया। बिस्मिल ने 'सरफरोशी की तमन्ना' जैसी रचनाएं लिखीं और 30 वर्ष की आयु में फांसी के फंदे को चूमा। इस अवसर पर कई आंदोलनकारी उपस्थित थे।

क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल की जयंती पर याद किए गए बलिदान

देहरादून। नेताजी संघर्ष समिति के कांवली रोड स्थित कार्यालय में गुरुवार को आजादी के अमर नायक पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की जयंती श्रद्धा के साथ मनाई गई। वक्ताओं ने उनके जीवन और देश के प्रति समर्पण को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। समिति के उपाध्यक्ष प्रभात डंडरियाल और प्रमुख महासचिव आरिफ वारसी ने बताया कि 11 जून 1895 को शाहजहांपुर के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे बिस्मिल एक ओजस्वी कवि और शायर थे। उन्होंने जेल में रहते हुए 'सरफरोशी की तमन्ना' और 'मेरा रंग दे बसंती चोला' जैसी अमर रचनाएं लिखीं, जो आज भी देशभक्ति का जोश भर देती हैं।

काकोरी कांड के महानायक बिस्मिल ने महज 30 वर्ष की आयु में देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूम लिया था। इस अवसर पर आंदोलनकारी प्रदीप कुकरेती, पारस यादव, जय बिष्ट, दानिश नूर, इलियास कुरैशी, गुलाम मुस्तफा, नितिन राठौड़ और संदीप गुप्ता सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।