इस्लाम में तीन तलाक बड़ा गुनाह और हलाला हराम, उलमा बोले जागरूकता जरूरी

हिन्दुस्तान, देहरादून
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तीन तलाक और हलाला जैसी कुप्रथाओं को रोकने को केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा सख्त कानून बनाए गए हैं। इस्लाम एवं शरीयत भी इन कुप्रथाओं की मुखालफत करता है। उधर, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि हलाला जैसी कुप्रथा का दर्द महिलाओं को झेलना पड़ता है। मुस्लिम मामलों के जानकारों ने इसे महिला उत्पीड़न बताया।

इस्लाम में तीन तलाक बड़ा गुनाह और हलाला हराम, उलमा बोले जागरूकता जरूरी

तीन तलाक और हलाला जैसी कुप्रथाओं को रोकने को केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा सख्त कानून बनाए गए हैं। वहीं, इस्लाम एवं शरीयत भी इन कुप्रथाओं की पुरजोर मुखालफत करता है। रुड़की में समान नागरिक संहिता के तहत हलाला का पहला मामला दर्ज होने के बाद अब फिर इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। उलमा एवं मुस्लिम मामलों के जानकारों ने एक सुर में तीन तलाक को बड़ा गुनाह और योजनाबद्ध हलाला को हराम बताया है। उन्होंने चिंता जताई कि ऐसे चंद लोगों की वजह से पूरी कौम बदनाम होती है। इसलिए समाज को जागरूक होकर ऐसे गलत कार्यों के खिलाफ मुहिम छेड़नी चाहिए। तीन साल की सजा और एक लाख जुर्माना

कानूनी प्रावधान

अधिवक्ता शिवा वर्मा ने बताया कि यूसीसी के तहत हलाला जैसी कुप्रथा को बढ़ावा देने, उसे करवाने या उसमें शामिल होने पर तीन वर्ष तक की सजा एवं एक लाख रुपये के जुर्माने का कड़ा प्रावधान है। कानून में यह भी व्यवस्था की गई है कि तलाक के बाद पति-पत्नी बिना किसी मध्यवर्ती प्रक्रिया के दोबारा सीधे निकाह कर सकते हैं। उधर, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा कि पति गुस्से एवं नशे में तीन तलाक दे देता है, लेकिन हलाला जैसी घिनौनी कुप्रथा का दर्द महिलाओं को झेलना पड़ता है। यूसीसी आने से ऐसे जालिमों पर सख्त कार्रवाई का हलाला होगा। बोर्ड रुड़की की पीड़ित महिला का पूरा कानूनी खर्च उठाएगा।

इस्लाम में तलाक का तरीका

मुस्लिम मामलों के जानकार खुर्शीद सिद्दीकी ने कहा कि कुछ लोग गुस्से एवं नशे में तीन तलाक कहकर अपने घर को उजाड़ देते हैं। होश आने पर हलाला की ठेकेदारी जन्म लेती है। यह शरीयत में बिल्कुल गलत और महिला उत्पीड़न है। इस्लाम में तलाक का तरीका बेहद सरल, संयमित और गंभीर है। यदि मतभेद बढ़े, तो पहले दोनों परिवार एवं जिम्मेदार लोग सुलह की कोशिश करें। ऐसा न होने पर शरीयत के मुताबिक तीन चरणों में तलाक दी जानी चाहिए, ताकि इस अवधि में गलती के अहसास और रिश्ता बरकरार रहने की गुंजाइश बची रहे। तलाक के बाद यदि स्वाभाविक रूप से दूसरे पति की मौत हो जाए या वह शरीयत के मुताबिक तलाक दे दे, तभी महिला अपनी मर्जी से पहले पति से दोबारा निकाह कर सकती है, न कि किसी साजिश के तहत।

कुप्रथाओं पर उलमा की राय

निकाह जैसे पवित्र सामाजिक और धार्मिक अनुबंध को गुस्से में तीन शब्दों के साथ खत्म करना शरीयत के नियमों का खुला उल्लंघन है। तथाकथित हलाला का रास्ता नाजायज और गुनाह-ए-अजीम है। समाज को इस अज्ञानता के खिलाफ उठ खड़ा होना चाहिए। - मुफ्ती हशीम सिद्दीकी, शहर काजी

एक बार में तीन तलाक बोलना शरीयत में सख्त गुनाह है। इस्लाम ने निकाह जैसे पवित्र रिश्ते को सोच-समझकर निभाने की हिदायत दी है। सुनियोजित हलाला करने और कराने वाले, दोनों पर अल्लाह की लानत है।

- मौलाना अब्दुल मन्नान कासमी, जिला सदर, जमीयत उलमा-ए-हिंद

इस्लाम ने महिलाओं को इज्जत और अधिकार दिए हैं। पैगंबर मोहम्मद साहब ने एक साथ तीन तलाक को सख्त नापसंद फरमाया है। तीन तलाक के समाधान के नाम पर हलाला जैसी घिनौनी प्रथा को अपनाना इस्लाम का मजाक उड़ाना है।

-मुफ्ती सलीम अहमद कासमी, शहर मुफ्ती

सामान्य प्रश्न

हलाला जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए क्या कानून बनाया गया है?
यूसीसी के तहत हलाला जैसी कुप्रथा को बढ़ावा देने, उसे करवाने या उसमें शामिल होने पर तीन वर्ष तक की सजा एवं एक लाख रुपये के जुर्माने का कड़ा प्रावधान है।
Chand Mohammad

लेखक के बारे में

Chand Mohammad

शॉर्ट बायो : चांद मोहम्मद पिछले 11 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान में देहरादून यूनिट में बतौर वरिष्ठ संवाददाता कार्य कर रहे है।


परिचय एवं अनुभव

चांद मोहम्मद हिंदी पत्रकारिता में एक प्रतिष्ठित नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 11 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान अखबार में देहरादून में कार्यरत है और हेल्थ रिपोर्टिंग कर रहे है। वह पिछले आठ साल से हिंदुस्तान से जुड़े है। स्वास्थ्य रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों पर उनकी मजबूत पकड़ है।


करियर का सफर

चांद ने अपने करियर की शुरुआत 2015 में अमर अखबार देहरादून से की। जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2018 में उन्होंने हिंदुस्तान ज्वाइन किया। वर्तमान में वह हेल्थ, मेडिकल एजुकेशन, मौसम, मुस्लिम कम्युनिटी रिपोर्टिंग के अलावा देहरादून हिंदुस्तान में सह सिटी प्रभारी और सह अपराध संवाददाता की भूमिका में है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि और रिपोर्टिंग

चांद बी कॉम और पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट है। वह यूपी के मुजफ्फरनगर के छोटे से गांव भंगेला से है। समाज के वंचित लोगों की आवाज उठाने, मरीजों की पीड़ा बयां करना उनका एक जज्बा बयां करता है। कोविड के दौरान उन्होंने पीड़ा बताती और सिस्टम पर प्रहार करती रिपोर्टिंग की। मेडिकल रिसर्च और हेल्थ से जुड़े विषयों पर उन्होंने काफी काम किया है। लगातार जागरूकता परक और रिसर्च बेस्ड स्टोरी हेल्थ और मौसम पर करते है।


विजन

चांद का विजन है कि वह अपने जर्नलिज्म से आम आदमी के मुद्दों को उठाए और उन्हें हल कराए। पाठकों के बीच अखबार की विश्वसनीयता बनाए रखे।


विशेषज्ञता

स्वास्थ्य रिपोर्टिंग, सामाजिक मुद्दों, मौसम, मुस्लिम कम्युनिटी के मामलों के जानकार है।

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