धन नहीं, धर्म को बढ़ावा दें : आचार्य शिवप्रसाद ममगांई

हिन्दुस्तान, देहरादून
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देहरादून में शनि मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन आचार्य शिवप्रसाद ममगांई ने धर्म, विनम्रता और सदाचार का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को धन नहीं, बल्कि धर्म को बढ़ावा देना चाहिए। धर्म से विनम्रता और सद्गुण आते हैं, जबकि धन व्यक्ति को अभिमानी बना सकता है।

धन नहीं, धर्म को बढ़ावा दें : आचार्य शिवप्रसाद ममगांई

देहरादून। सहस्त्रधारा रोड स्थित शनि मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य शिवप्रसाद ममगांई ने श्रद्धालुओं को धर्म, विनम्रता और सदाचार का संदेश दिया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि मनुष्य को धन नहीं बल्कि धर्म को बढ़ावा देना चाहिए। धर्म जब किसी व्यक्ति के जीवन में आता है तो उसके साथ विनम्रता, उदारता और सद्गुण स्वतः आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि विनम्रता धर्म का स्वभाव है, जैसे फूलों के साथ सुगंध और दीपक के साथ प्रकाश सहज रूप से जुड़े रहते हैं। आचार्य ममगांई ने कहा कि धन और धर्म दोनों व्यक्ति की चाल बदल देते हैं।

धन आने पर मनुष्य अकड़ कर चलता है, जबकि धर्म आने पर वह विनम्र हो जाता है। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि संपत्ति मनुष्य को कौरवों की तरह अभिमानी बना सकती है, जबकि सन्मति उसे पांडवों की तरह विनम्र बना देती है।उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति लक्ष्मी को भगवान नारायण की कृपा मानकर उसका सदुपयोग करता है और विनम्रता के साथ जीवन जीता है, वही सच्चा साधक कहलाने योग्य है। धर्म का आश्रय व्यक्ति को उदार और समाजोपयोगी बनाता है। इस अवसर पर नंदन सिंह विष्ट, रेखा विष्ट, लोकित विष्ट, मंजू विष्ट, शशि मुरारका, मंजू मुरारका, नितेश मुरारका, पारू राधिका, आचार्य रमेश उनियाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

Omprakash Sati

लेखक के बारे में

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शॉर्ट बायो : ओमप्रकाश सती पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में फारेस्ट, वाइल्डलाइफ, पाल्युशन एंड इनवायरमेंट, मार्केट, टेक और एजुकेशन से जुड़े समाचार लिख रहे हैं।


परिचय एवं अनुभव
ओमप्रकाश सती को पत्रकारिता में 18 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में फारेस्ट,वाइल्डलाइफ,एजुकेशन ,मार्केट एंड यूथस से जुड़े विषय पर काम कर रहे हैं।उनको फारेस्ट ,वाइल्डलाइफ और पोल्युशन से जुड़े विषयों का काफ़ी लंबा अनुभव है।


करियर का सफर
ओमप्रकाश ने अपने करियर की शुरुआत 2008 में अमर उजाला कॉम्पैक्ट से की थी। इसके बाद अमर उजाला में 2015 तक काम किया। 2015 से वे हिन्दुस्तान के प्रिंट और डिजिटल में अपनी सेवा दे रहे हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि
बीएससी (पीसीएम)और मास कम्युनिकेशन में पीजी डिप्लोमा के बाद उन्होंने पत्रकारिता की राह चुनी। वे लंबे समय तक क्राइम रिपोर्टिंग में भी रहे। जिस कारण हार्ड खबरों में उनकी पकड़ काफी मजबूत है। एजुकेशन, वाइल्डलाइफ, पोल्युशन और इनवायरमेंट से जुड़े शोधों में उनकी रुचि और पकड़ है।


विशेषज्ञता
प्राइमरी एंड हायर एजुकेशन
इंडियन वाइल्डलाइफ एक्ट्स एंड लॉ
करियर विकल्प
हिमालयन वाइल्डलाइफ
ह्यूमन वाइल्डलाइफ कॉन्फ्लिक्ट
हिमालयन फ्लोरा एंड फोना

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