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शत्रुघ्न सिन्हा पर लिखी किताब में बिग-बी से उनके मनमुटाव और खटास पर कई बातें

अभिनेता और राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने देहरादून लिटरेचर फेस्ट-2018 के दूसरे संस्करण के कर्टन रेजर में अपनी पुस्तक एनीथिंग बट खामोश का विमोचन किया। प्रशंसकों की डिमांड पर शत्रु ने अपने कुछ बेहद चर्चित डायलॉग सुनाकर दर्शकों का दिल जीत लिया।

डालनवाला स्थित समर वैली स्कूल में हुए शॉटगन के नाम से मशहूर शत्रुघ्न सिन्हा ने पुस्तक का विमोचन समरवैली स्कूल के डायरेक्टर आभ्या वासु, रणधीर अरोड़ा, अनुराग चौहान, भारती एस प्रधान के साथ संयुक्त रूप से किया। उन्होंने कहा कि पुस्तक को तैयार होने में सात साल का समय लगा। ये उनकी सबसे प्रमाणिक जीवनी है। जिसमें मनोरंजन का ख्याल तो रखा ही गया है पर जीवन के प्रति पूरी ईमानदारी बरती गई है। पाठकों को इस पुस्तक में शत्रुघ्न   सिन्हा के जीवन के विभिन्न आयाम, रुपहले पर्दे से लेकर राजनैतिक सफर को खूबसूरती से बयां किया गया है। इस किताब का नाम भी उनके बेहद लोकप्रिय हुए डायलॉग खामोश पर ही रखा है।

लेखिका भारती एस प्रधान ने बताया कि इस पुस्तक को शत्रुघ्न सिन्हा के 37 साक्षात्कार और सिन्हा परिवार से 200 घंटों से भी अधिक समय की बातचीत के आधार लिखा है। बायोग्राफी में उनके और बिग बी के बीच मनमुटाव और खटास के बारे में कई बातें लिखी हैं। इस बारे में शत्रु का नजरिया साफ है यदि हम दोस्त हैं, तो हमें लड़ने का भी हक है। अगर आज आप मुझसे पूछें तो मैं कहूंगा कि मेरे दिल में अमिताभ बच्चन के लिए बेहद आदर है और मैं उन्हें पर्सनालिटी ऑफ द मिलेनियम मानता हूं।

इस दौरान सिन्हा ने दर्शकों की मांग पर ‘कह देना छैनू आया था..’ और ‘खामोश’ जैसे डायलॉग भी सुनाए। इस मौके पर पुस्तक की लेखिका भारती एस प्रधान के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वे शुरू से ही एक्टर बनना चाहते थे। जबकि उनके पिता डॉक्टर बनाना चाहते थे। उसके तीन भाई डॉक्टर ही हैं। अपनी रुचि के क्षेत्र में जाकर उन्होंने जो सफलता पाई उस पर उन्हें गर्व है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि अपने बच्चों को आत्मविश्वासी बनाएं, उनकी पसंद का क्षेत्र चुनने में मदद करें। अपनी बात न थोपें। उनका मानना है कि बच्चों को खेल, कला, शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने से नहीं रोकना चाहिए।

ये जरूर है कि उन्हें धूम्रपान, तम्बाकू, नशीले पदार्थों से सख्ती से दूर रखें। उन्होंने इस बात का भी खुलासा कि किस प्रकार वह धूम्रपान से दूर हुए। उन्होंने प्रशंसकों के कई सवालों के जवाब भी दिए। स्कूल के 25 साल पूरे होने पर सभी शिक्षक व स्टाफ को बधाई दी। लिटरेचर फेस्ट के आयोजक अनुराग चौहान ने बताया कि फेस्ट का उद्देश्य देश भर के ख्यातिलब्ध लेखकों को दूनवासियों से रू ब रू कराना है। रणधीर अरोड़ा ने बताया कि लिस्टरेचर फेस्ट के दूसरे संस्करण का आयोजन मार्च में होगा। मौके पर सभ्रांत विरमानी, समरवैली स्कूल की प्रिंसिपल नीलम, पूर्व प्रिंसीपल कर्नल (डा.) जसविंदर सिंह आदि मौजूद थे।

दमन और सम्मान के बीच झूल रहा हूं मैं 

समरवैली में शत्रु के सामने उनके नन्हें प्रशंसक अधिक थे। इसलिए वह अधिकतर समय बच्चों को प्रेरणादायक बातें ही समझाते रहे। बीच में एक प्रशंसक द्वारा पूछे गए सवाल पर जरूर उन्होंने मौजूदा राजनैतिक दृश्य को खींचने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि इस समय वह राजनैतिक रूप से दमन और सम्मान के बीच झूल रहे हैं। उन्होंने हमेशा व्यक्ति के ऊपर पार्टी और पार्टी से ऊपर देश को तरजीह दी है। इसमें किसी को बुरा लगे तो वह परवाह नहीं करते।

घर में पूरी रामायण 

शत्रु ने बच्चों को बताया कि किस तरह उनके घर में पूरी रामायण है। इसलिए उन्होंने घर का नाम ही रामायण रख दिया है। सभी भाईयों के नाम राम, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न हैं। उनके बेटों का नाम लव और कुश है। 

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  • Web Title:Release of book written on Shatrughan Sinha