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एनसीईआरटी की पूर्व में प्रकाशित किताबों से छह रुपये तक सस्ती है किताबों

राज्य में पहली और दूसरी कक्षा की एनसीईआरटी की किताबों की किल्लत खत्म होने जा रही है। निशुल्क श्रेणी की इन करीब छह लाख किताबों की छपाई कर रहे प्रकाशक ने गुरुवार को मार्केट में किताबें उतार दीं। ये किताबें पूर्व में सशुल्क श्रेणी की किताबों से करीब छह रुपये सस्ती भी हैं। गुरुवार दोपहर ननूरखेड़ा स्थित सर्व शिक्षा अभियान के मुख्यालय में अपर सचिव और महानिदेशक-शिक्षा कैप्टेन आलोक शेखर तिवारी ने छहों किताबों का विमोचन किया। दूसरी तरफ, दूसरी से 12 वीं कक्षा की किताबों के लिए शिक्षा विभाग ने 23 जून को बैठक बुलाई है। उम्मीद की जा रही है इस महीने के आखिर तक किताबों की कमी का संकट काफी कुछ दूर हो जाएगा। 
महानिदेशक ने बताया कि सरकार ने यूपी अथवा एनसीईआरटी से सीधा किताबें खरीदने की अनुमति दे दी है। इस पर 23 जून की बैठक में निर्णय ले लिया जाएगा। मालूम हो कि शिक्षा विभाग के सर्वे के अनुसार वर्तमान में राज्य में पहली से 12 वीं कक्षा तक की 31 लाख से ज्यादा किताबों की कमी है।
विमोचन के मौके पर उप निदेशक जेपी यादव, प्रकाशक गौरव अग्रवाल, प्रशासनिक अधिकारी बीपी मैंदोली आदि भी मौजूद रहे। 

किताबों का एक सर्वे और
राज्य में किताबों की कमी का लेकर शिक्षा विभाग एक और सर्वे कराने जा रहा है। महानिदेशक ने बताया कि एनसीईआरटी की 248 किताबों में 78 ऐसी भी हैं, जो ज्यादा जरूरी नहीं हैं। इन विषयों की छात्र संख्या न के बराबर है। सभी सीईओ को 29 जून तक विषयवार किताबों की आवश्यकता का नया सर्वे करने को कहा है। 30 जून को दून में इसकी समीक्षा की जाएगी। मालूम हो कि अब तक शिक्षा विभाग दो सर्वे करा चुका है। पहले सर्वे में अधिकारियों ने पर्याप्त किताबें होने का दावा किया था। तो दूसरे में उन्होंने 31 लाख से ज्यादा किताबों की कमी बता दी थी।

यूपी में 50 फीसदी सस्ती किताबें 
देहरादून। यूपी में एनसीईआरटी किताबों उत्तराखंड के मुकाबले 50 प्रतिशत तक सस्ती हैं। सूत्रों के अनुसार कक्षा नौ की अर्थशास्त्र की जो किताबें उत्तराखंड में 44 रुपये की हैं, वही किताबों यूपी में महज 11 रुपये की हैं। कक्षा 10 की विज्ञान की किताबें राज्य में  161 रुपये की है और यूपी में महज 66 रुपये की। बाकी किताबों के मूल्य में इसी अनुपात में ही अंतर है। इसके पीछे यूपी में किताबों की छपाई बडे़ पैमाने पर होने को बताया जा रहा है। अधिक संख्या में किताबें छपने पर उनकी लागत स्वयं ही कम हो जाती है।

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  • Web Title:Publishers launch NCERT cheaper books in market