उत्तराखंड के पौराणिक गीत, जागर वंदनाओं का दस्तावेजीकरण होगा: खजानदास
उत्तराखंड के गढ़वाल, कुमाऊं और जौनसार बावर क्षेत्र के पौराणिक गायनों और जागरों को सुरक्षित रखने के लिए उनका दस्तावेजीकरण किया जाएगा। भाषा मंत्री खजानदास ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्थानीय मेलों में जाकर जानकारी जुटाएं। मुख्यमंत्री ने युवा साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने और बुजुर्ग साहित्यकारों को पेंशन देने की भी बात की।

राज्य के गढ़वाल, कुमांऊ व जौनसार बावर क्षेत्र में विभिन्न अवसरों पर होने वाले पौराणिक गायनों, जागर, वंदना आदि को सुरक्षित रखने के लिए उनका दस्तावेजीकरण होगा। भाषा मंत्री खजानदास ने मंगलवार को विधानसभा में विभागीय समीक्षा के दौरान अधिकारियों को इसके निर्देश दिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जौनसार बावर क्षेत्र में पौराणिक काल से प्रचलित पंडवाणी गायन बाकणा विलुप्ति की कगार पर है। इसी प्रकार अन्य पौराणिक विधाओं को आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखने के लिए अधिकारी स्थानीय मेलों व अन्य धार्मिक आयोजनों में स्वयं जाकर जानकारी लें। और, उनके संरक्षण और प्रसार के लिए कार्य करें।मुख्यमंत्री
पुष्कर सिंह धामी की प्राथमिकता के अनुसार नवाचार पर बल दिया जाए। राज्य के युवा एवं बाल साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रयास किये जाएं। उन्होंने बुजुर्ग साहित्यकारों को पेंशन योजना का लाभ देने के लिए बजट प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए। दीर्घकालीन साहित्यिक योगदान एवं साहित्य सेवा के लिए साहित्यकारों को दिया जाने वाला दीर्घकालीन साहित्यसेवी सम्मान आगामी समय में प्रदेश के अधिक से अधिक पात्र साहित्यकारों को दिया जाए। बैठक में भाषा सचिव उमेश नारायण पांडेय, अपर सचिव मायावती डकरियाल, निदेशक जसविंदर कौर एवं अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
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