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VIDEO : हुजूर! 1947 में पाकिस्तान में छूट गई प्रॉपर्टी का ढाई करोड़ मुआवजा दीजिए

भारत-पाकिस्तान बंटवारे के अब 70 साल हुए जा रहे हैं, लेकिन इसका हिसाब-किताब अभी बाकी है। इसी में शामिल हैं देहरादून के विकासनगर रिफ्यूजी (पंजाबी कॉलोनी) निवासी सरदार मंजीत सिंह बेदी। बेदी पाकिस्तान के एबटाबाद में छूट गई अपनी पारिवारिक प्रॉपर्टी का मुआवजा मांग रहे हैं। पढ़िए पूरी कहानी...

मंजीत सिंह ने देहरादून में प्रशासन के सामने रखा पूरा मामला

मंजीत सिंह ने देहरादून में डीएम की गैरमौजूदगी में एडीएम प्रशासन अरविंद पांडेय के सामने अपना मामला रखा। मंजीत के अनुसार पाकिस्तान के छावनी शहर एबटाबाद में उनके पिता स्वर्गीय दयाल सिंह के पास सौ बीघा से अधिक जमीन और कोठी थी। देश विभाजन के बाद उन्हें रातोंरात भारत आना पड़ा। बेदी परिवार पटियाला, देहरादून होते हुए आखिरकार विकासनगर पहुंचा। 

पंचाब सरकार 1948 में पचास हजार मुआवजा स्वीकृत किया था 

उन्होंने बताया कि भारत आते ही उनके पिता ने तत्कालीन पूर्वी पंजाब सूबे के रिफ्यूजी क्लेम रजिस्ट्रार के पास अपनी प्रॉपर्टी के लिए क्लेम प्रस्तुत किया। पंजाब सरकार ने इसे सही मानते हुए उनके पिता के नाम 12 जून 1948 को पचास हजार रुपये स्वीकृत भी किए। लेकिन विभाजन के बाद पूरी तरह बिखर चुकी जिंदगी को पटरी पर लाने की जद्दोजहद में तब वह मुआवजा कैश नहीं करवा पाए। इस बीच उनके पिता की मौत हो गई और परिवार इस कहानी को भूल बैठा।

दो साल पहले पाकिस्तान स्थित प्रॉपर्टी के दस्तावेज हाथ लगे 

इधर, दो साल पहले घर में उन्हें पाकिस्तान स्थित प्रॉपर्टी और इसके बदले पंजाब सरकार से स्वीकृत मुआवजा के दस्तावेज हाथ लगे तो उन्होंने मुआवजा पाने के लिए फिर दौड़ धूप शुरू की। इस क्रम में वह पीएमओ, मुख्यमंत्री कार्यालय को भी चिट्ठी लिख चुके हैं। पीएमओ ने राज्य सरकार को इस मामले में कार्रवाई के लिए कहा है। गुरुवार को मंजीत सिंह इस मामले की फिर पैरवी करने जिलाधिकारी कार्यालय में पहुंचे। यहां एडीएम अरविंद पांडेय ने पूरा मामला समझते हुए मंजीत सिंह को मामले में सचिवालय से पत्राचार करने का भरोसा दिया है। 

पचास हजार मुअावजे के ब्याज लगाकर हो गए अब ढाई करोड़ 

मंजीत के परिवार के नाम पंजाब सरकार ने 1948 में पचास हजार रुपये का मुआवजा स्वीकार किया था। जबकि अब उन्होंने इस रकम को ब्याज सहित दो करोड़ 56 लाख तक पहुंचने का हिसाब लगाते हुए मुआवजा मांगा है। मंजीत इन दिनों विकासनगर में फोटो फ्रेमिंग का काम करते हैं। 

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  • Web Title:Pak refugees seek compensation for property in Pakistan
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