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बुग्याल संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा बुग्यालों में आवाजाही नियंत्रित होनी के साथ रात्रि विश्राम पर भी रोक लगनी चाहिए

आली, वेदनी, बगजी बुग्याल संघर्ष समिति के सदस्यों ने हाईकोर्ट के निर्णय का स्वागत किया है। इस मौके पर बुग्यालों के जाने-माने पर्यावरणविद् और बुग्यालों के संरक्षक स्व. कैप्टन दयाल सिंह पटवाल के कार्यों को याद करके उनको श्रद्धांजलि दी गई। वक्ताओं ने कहा कि, आली, वेदनी, बगजी बुग्यालों में मानवीय हस्तक्षेप पर नियंत्रण हो। बुग्याल संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष हीरा सिंह बुग्याली, संरक्षक तारा दत्त कुनियाल और सामाजिक कार्यकर्ता हीरा सिंह गढ़वाली ने कहा की आली वेदनी, बगजी बुग्याल संघर्ष समिति के द्वारा दायर की गई याचिका पर हाइकोर्ट द्वारा दिये गये फैसले का सभी लोग सम्मान करते हैं। वक्ताओं ने कहा कि बुग्यालों में आवाजाही नियंत्रित होनी चाहिए। साथ ही बुग्यालों में रात्रि विश्राम पर भी रोक लगनी चाहिए। रात्रि विश्राम टिम्बंर रेखा से नीचे होना चाहिए। जिससे बुग्यालों में मौजूद बहुमूल्य वनस्पतियों को कोई नुकसान न पहुंचे और बुग्याल हमेशा हरे-भरे सके। रूपकुंड, वेदनी, आली बुग्याल के लिए ट्रैकिग का संचालन आली-वेदनी-बगजी बुग्याल संघर्ष समिति के जरिए किया जाय। जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। ट्रैकिंग एक निश्चित संख्या में हो जिससे बुग्यालों पर दबाव कम हो। कहा, लंबे संघर्षों के बाद आखिरकार आली बगजी वेदनी बुग्याल संघर्ष समिति की मेहनत रंग लाई है। जिसमें सबसे बड़ा योगदान स्व. कैप्टन दयाल सिंह पटवाल का रहा है और उन्होंने हमेशा बुग्यालों के संरक्षण के लिए कठिन प्रयास किये थे। इसलिए कैप्टन् पटवाल के योगदान को पर्यावरण प्रेमी कभी भुला नहीं सकेंगे। बैठक में भुवन सिंह बिष्ट, रघुवीर सिंह, हीरा पहाड़ी, खडग सिंह, रणजीत सिंह, गंगा सिंह पटवाल, लक्ष्मण सिंह, खिलाप सिंह, राजू शाह, इंद्र सिंह राणा सहित कई लोग उपस्थित थे। 

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  • Web Title:night stay should be restricted in meadows