नागालैंड की संस्कृति से रूबरू हुए दूनवासी
दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में 'नागालैंड की ओर: दीवार पर लगे दर्पण तक की हमारी यात्रा' शीर्षक से एक विशेष स्लाइड शो और व्याख्यान का आयोजन हुआ। इसमें अनूप साह और एस.एस. रसायली ने नागालैंड की समृद्ध विरासत और जीवनशैली के बारे में अपने अनुभव साझा किए। मेजर जनरल आनंद सिंह रावत ने 'ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल' के सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला।

दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में गुरुवार को नागालैंड के समाज और संस्कृति पर आधारित एक विशेष स्लाइड शो और व्याख्यान का आयोजन किया गया। 'नागालैंड की ओर: दीवार पर लगे दर्पण तक की हमारी यात्रा' शीर्षक से आयोजित इस कार्यक्रम में पद्मश्री अनूप साह और सेवानिवृत्त आईएफएस एस.एस. रसायली ने अपने अनुभवों को साझा किया। व्याख्यान के दौरान वक्ताओं ने नागालैंड की समृद्ध विरासत पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वहां की जीवनशैली को हीन भावना के बजाय उनकी परिस्थितियों के आधार पर समझने की आवश्यकता है। मुख्य वक्ता मेजर जनरल आनंद सिंह रावत ने 'ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल' के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए उसे नागा पहचान, शक्ति और एकता का प्रतीक बताया।
कार्यक्रम का संचालन चंद्रशेखर तिवारी ने किया। इस मौके पर सचिव संस्कृति जुगल किशोर पंत, धनंजय मोहन, बी.एस. रावत, अशोक महर, पंकज नैथानी, डॉ. डी.के. पाण्डे, हरि चंद निमेष, जगदीश बाबला, ज्ञान रंजन, सोहन सिंह रजवार मौजूद रहे।
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