कब्रिस्तान विवाद सुलझाने को वक्फ बोर्ड और समाज के लोग एकजुट
शहर में कब्रिस्तानों में जगह की कमी और स्थानीय-बाहरी विवादों को सुलझाने के लिए मुस्लिम समाज के लोगों ने बैठक की। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा कि कब्रिस्तान सभी के लिए हैं और राजनीति करना गलत है। जगह की कमी को देखते हुए लोहिया नगर कब्रिस्तान का अधिक उपयोग करने की अपील की गई।
शहर में कब्रिस्तानों में बढ़ती जगह की कमी और स्थानीय-बाहरी के नाम पर उपजे विवादों को सुलझाने के लिए मुस्लिम समाज के जिम्मेदार लोगों और उलेमाओं ने एकजुटता दिखाई है। शनिवार रात को आजाद कॉलोनी में अब्दुल कलाम आजाद स्कूल में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने स्पष्ट किया कि हर कब्रिस्तान सभी के लिए हैं और इस पर राजनीति करना गलत है। जगह की कमी पर दूसरे कब्रिस्तानों को प्रयोग करने की अपील की जा रही है, मना किसी को नहीं किया जा रहा है। उन्होंने लोहिया नगर कब्रिस्तान में पानी, भरान, रास्ते जैसी समस्याओं को दूर करने और वहां एक हजार पेड़ लगवाने का एलान किया।
मुफ्ती वासिल की अध्यक्षता में हुई बैठक का मुख्य उद्देश्य लोहिया नगर कबाड़ी बाजार के पास स्थित कब्रिस्तान में आ रही दिक्कतों को दूर करना था। वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा कि जनसंख्या घनत्व को देखते हुए अब अधिक से अधिक दफिना (अंतिम संस्कार) लोहिया नगर कब्रिस्तान में ही किया जाए, ताकि अन्य जगहों पर दबाव कम हो सके। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बेवजह राजनीति कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि जगह कम होने पर नए कब्रिस्तानों के प्रयोग की जरूरत है। लोहियानगर कब्रिस्तान से ब्राह्मणवाला, माजरा, आजाद कॉलोनी, टर्नर रोड, कारगी के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। इस दौरान कब्रिस्तान कमेटी अध्यक्ष इसरार अहमद, नदीम जैदी, अहसान, अब्दुल वहाब, साजिद मलिक, मास्टर आबिद, आफताब आलम, मास्टर मुस्तकीम, हाफिज शाहनजर, हसीन, नासिर, मजहर खान, मोहम्मद साजिद, गुलफाम शेख, जाकिर और इमरान अहमद आदि मौजूद रहे।कब्रिस्तान में क्षेत्र के आधार पर रोकना अमानवीय : नईम कुरैशीमोरोवाला और सुभाषनगर जैसे इलाकों में बाहरी परिवारों के यहां मौत पर शवों को दफनाने पर रोक के विवाद पर मुस्लिम सेवा संगठन के अध्यक्ष नईम कुरैशी ने इसे गलत बताया है। उन्होंने कहा कि कब्रिस्तान वक्फ की संपत्ति है और किसी को भी क्षेत्र के आधार पर रोकना अमानवीय है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि यह जमीन का नहीं बल्कि इंसानियत का मुद्दा है।मोरोवाला कब्रिस्तान का मुद्दा कब हल होगा?सबसे ज्यादा विवाद मोरोवाला कब्रिस्तान को लेकर है। यहां का मसला हल होने पर विवाद का निपटारा हो सकता है। आरोप है कि यहां पर वार्ता की पहल नहीं हो पा रही है। टर्नर रोड निवासी आसिफ बेग ने कहा कि मोरोवाला कब्रिस्तान में यदि जमीन कम पड़ रही है, तो वी भरान और बराबर की जमीन खरीदने में चंदा देने को तैयार है, लेकिन कमेटी वार्ता ही नहीं करना चाहती। वहीं, कमेटी जगह कम होने का हवाला दे रही है। उधर, सामाजिक कार्यकर्ता खुर्शीद अहमद ने कहा कि मोरोवाला एवं सुभाषनगर में बाहरी बताकर शव दफनाने से मना करना गलत है। प्रशासन एवं वक्फ बोर्ड को चाहिए इसका जल्द हल निकाले।
लेखक के बारे में
Chand Mohammadशॉर्ट बायो : चांद मोहम्मद पिछले 11 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान में देहरादून यूनिट में बतौर वरिष्ठ संवाददाता कार्य कर रहे है।
परिचय एवं अनुभव
चांद मोहम्मद हिंदी पत्रकारिता में एक प्रतिष्ठित नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 11 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान अखबार में देहरादून में कार्यरत है और हेल्थ रिपोर्टिंग कर रहे है। वह पिछले आठ साल से हिंदुस्तान से जुड़े है। स्वास्थ्य रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों पर उनकी मजबूत पकड़ है।
करियर का सफर
चांद ने अपने करियर की शुरुआत 2015 में अमर अखबार देहरादून से की। जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2018 में उन्होंने हिंदुस्तान ज्वाइन किया। वर्तमान में वह हेल्थ, मेडिकल एजुकेशन, मौसम, मुस्लिम कम्युनिटी रिपोर्टिंग के अलावा देहरादून हिंदुस्तान में सह सिटी प्रभारी और सह अपराध संवाददाता की भूमिका में है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और रिपोर्टिंग
चांद बी कॉम और पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट है। वह यूपी के मुजफ्फरनगर के छोटे से गांव भंगेला से है। समाज के वंचित लोगों की आवाज उठाने, मरीजों की पीड़ा बयां करना उनका एक जज्बा बयां करता है। कोविड के दौरान उन्होंने पीड़ा बताती और सिस्टम पर प्रहार करती रिपोर्टिंग की। मेडिकल रिसर्च और हेल्थ से जुड़े विषयों पर उन्होंने काफी काम किया है। लगातार जागरूकता परक और रिसर्च बेस्ड स्टोरी हेल्थ और मौसम पर करते है।
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