विधायक मगन लाल 2 बार चुनाव हारे पर हिम्मत नहीं हारी, जानिए उनके बारे में सब कुछ
दिवंगत विधायक मगन लाल शाह लगातार दो बार विधानसभा चुनाव हारे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। विडंबना देखिए तीसरे प्रयास में विधानसभा चुनाव जीतने वाले मगन लाल शाह बतौर विधायक एक साल भी पूरा नहीं कर...

दिवंगत विधायक मगन लाल शाह लगातार दो बार विधानसभा चुनाव हारे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। विडंबना देखिए तीसरे प्रयास में विधानसभा चुनाव जीतने वाले मगन लाल शाह बतौर विधायक एक साल भी पूरा नहीं कर पाए। लंबे संघर्ष के बाद उन्होंने जीत हासिल की थी। हालांकि अपने एक साल से कम के वक्त में भी वह क्षेत्रवासियों के दिलों में जगह बनाने में कामयाब रहे।
भाजपा के विधायक मगनलाल शाह अब हमारे बीच नहीं हैं। 57 साल के विधाक मगन लाल शाह विधायक थराली से भाजपा के विधायक थे। वे एक सर्राफा व्यापारी थे। वहीं वे ठेकेदार भी थे। हालांकि वे दसवीं पास थे, लेकिन उनकी प्रतिभा किसी से कम नहीं थी। चमोली जिले में नारायणबगड़ ब्लॉक के नलगांव गांव में जन्मे मगनलाल शाह की पहचान जमीन से जुड़े नेता के रूप में थी। वह पूर्व सीएम और पौड़ी सांसद भुवन चंद खंडूड़ी के बेहद करीबियों में से थे। भाजपा में वह यूपी के जमाने से ही सक्रिय थे। उत्तराखंड बनने के बाद जब पिंडर (अब थराली) विधानसभा आरक्षित हुई तो उन्हें टिकट मिलने की संभावना थी, लेकिन भाजपा ने 2002 में गोविंद लाल शाह (जीएल शाह) को टिकट दे दिया, तब मगन लाल नाराज हो गए थे। हालांकि उन्हें मना लिया गया था। 2007 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने फिर जीएल शाह को मौका दिया। इस बार मगन लाल शाह ने पार्टी में बगावत की और यूकेडी के टिकट पर चुनाव लड़े, हालांकि वह हार गए।
2009 में मगनलाल शाह ने त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव में अपने क्षेत्र पंचायत वार्ड गंडी कफ़ौली से चुनाव लड़ा और क्षेत्र पंचायत सदस्य के तौर पर जीतकर आए। वे नारायणबगड़ के ब्लॉक प्रमुख भी बने। यहां से उन्होंने अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत की। यही वजह थी कि पार्टी ने वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में लगातार दो बार विधायक रहे जीएल शाह के बजाय मगन लाल शाह पर भरोसा जताया और बीजपी के टिकट पर मगन लाल चुनाव लड़े। तब परिसीमन के बाद यह सीट थराली हो गयी थी, लेकिन इस बार उन्हें विपक्षी कांग्रेस से उम्मीदवार डॉ. जीतराम से कड़ी टक्कर मिली। इस हार का मलाल इसलिए भी ज्यादा था क्योंकि मगनलाल शाह करीब 400 वोट के अंतर से चुनाव हार गए।
2014 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में उनकी पत्नी मुन्नी देवी शाह ने कोठली जिला पंचायत सदस्य सीट से चुनाव लड़ा। यहां जीत के साथ ही वह जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव भी जीतीं। खुद ब्लॉक प्रमुख रहने और पत्नी के जिला पंचायत अध्यक्ष होने का लाभ उन्हें 2017 के विधानसभा चुनाव में मिला। पिछले साल हुए विधानसभा सभा चुनावों में पार्टी ने मगनलाल शाह पर भरोसा जताया। मगन लाल शाह ने भी इस भरोसे पर खरा उतरते हुए लगभग 4300 के भारी अंतर से अपने प्रतिद्वंद्वी डॉ. जीतराम को हराया। मगन लाल शाह बतौर विधायक एक साल से भी कम वक्त तक रहे, हालांकि उन्होंने अपने छोटे से कार्यकाल में क्षेत्रवासियों का दिल जीता है। वह जीतने के बाद लगातार क्षेत्र में सक्रिय थे। उनके निधन की सूचना पर हर कोई हतप्रभ है।
पिता भी सामाजिक कार्यकर्ता
मगन लाल शाह नारायणबगड़ ब्लॉक के नलगांव के रहने वाले थे। उनके पिता वचन लाल भी पिंडरघाटी में सामाजिक कार्यों के लिए जाने जाते थे। जब नलगांव में पुल नहीं था, तब इनके गांव वाले पिंडर नदी पार कराने का काम करते थे। विधायक शाह के पिता कर्णप्रयाग तहसील में अरायज नवीश का काम करते थे।
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