साहित्यकारों का आंचलिक भाषाओं के संरक्षण पर जोर
फोटो अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर भाषा संस्थान में हुई संगोष्ठी देहरादून, वरिष्ठ संवाददाता। उत्तराखंड भाषा संस्थान द्वारा शनिवार को अंतरराष्ट्रीय म

उत्तराखंड भाषा संस्थान द्वारा शनिवार को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर भाषा संस्थान के राजपुर रोड स्थित सभागार में संगोष्ठी हुई। जिसमें हिन्दी, गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी, रवाल्टी, उर्दू, पंजाबी और नेपाली भाषाओं के साहित्यकारों ने मातृभाषा के संरक्षण पर जोर दिया। अम्बर खरबन्दा व मौ. इम्तियाज अकबराबादी ने उर्दू शायरी के माध्यम से मातृभाषा के महत्व को रेखांकित किया। पंजाबी साहित्यकार प्रेम साहिल और दलजीत कौर ने पंजाबी भाषा के विकास और उसकी समृद्ध साहित्यिक परंपरा पर प्रकाश डाला। गढ़वाली में कलम सिंह लिंगवाल तथा जौनसारी में सुनीता चौहान ने कविता पाठ कर श्रोताओं को भावविभोर किया। पीएन राई ने नेपाली भाषा को जन-जीवन से जोड़ने की आवश्यकता बताई।
डॉ. कमला पंत ने कुमाऊंनी भाषा के प्रचार-प्रसार पर विचार व्यक्त किए। डॉ. सविता मोहन ने हिन्दी, गढ़वाली और कुमाऊंनी के पारस्परिक संबंधों पर प्रकाश डाला। निदेशक मायावती ढकरियाल ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। संगोष्ठी का संचालन भारती आनन्द ने किया, जबकि उपनिदेशक जसविन्दर कौर ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में डॉ. दलजीत कौर, राजेश आनन्द असीर, मीना राई, उदय ठाकुर, डॉ. अर्चना डिमरी, कुलवीर चन्नी, जिया नहटौरी उपस्थित रहे।
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