महिला हिंसा रोकने के लिए समाज के जागरूकता की जरूरत

महिला हिंसा रोकने के लिए समाज के जागरूकता की जरूरत

संक्षेप:

दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र में महिला उत्तरजन सोसाइटी ने अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर 'स्त्री हिंसा का सच बनाम स्त्री समानता का कठिन स्वप्न' पर संगोष्ठी का आयोजन किया। वक्ताओं ने समाज में महिला हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई और जागरूकता फैलाने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में छात्राओं को पुरस्कृत भी किया गया।

Dec 10, 2025 07:19 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, देहरादून
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दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र में महिला उत्तरजन सोसाइटी के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर ‘स्त्री हिंसा का सच बनाम स्त्री समानता का कठिन स्वप्न’ पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया। संगोष्ठी में महिलाओं के साथ हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए समाज में जागरूकता की जरूरत बताई गई। कार्यक्रम की संयोजक बिमला रावत ने कहा कि वर्ष 2017 से महिलाओं और बेटियों के सवालों पर काम कर रही सामाजिक संस्था महिला उत्तरजन सोसाइटी कुछ वर्षों से इस विषय पर समाज और शासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए इस मुद्दे को उठा रही है। यह इसलिए जरूरी है कि आज समाज में महिला हिंसा घिनौने और विकृत रूप में दिखाई दे रही है।

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यदि समाज ने इसकी निंदा नहीं की तो एक दिन समाज फिर विकृति की ओर लौट सकता है। वक्ताओं का मानना था कि समाज में फैली स्त्री हिंसा एक महामारी की तरह फैली है। वर्तमान में महिला हिंसा में काफी बढ़ोतरी हो रही है। इसमें 30 फीसदी, घरेलू हिंसा के रुप में है। महिला हिंसा एक तरह मनोवैज्ञानिक बीमारी के रुप में व्याप्त है। विधिक वार्ताकार रामिन्द्री मन्द्रवाल ने कहा 1776 में अमेरिका आजाद हुआ, लेकिन एक भी महिला राष्ट्रपति नहीं हुई। महिला की सशक्तीकरण स्वंय उसके अन्दर है। समाज में शिक्षा रोजगार जीवन जीने की समानता होनी। मुख्य अतिथि प्रो. रचना नौटियाल ने कहा अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस लिंग विषमता का एक महत्वपूर्ण विषय है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वीणा बाना ने समाज में महिला हिंसा रोकने के लिए व्यापक तौर पर समाज में जागरूकता लाने की बात कही। कार्यक्रम में निबन्ध लेखन, चित्रकला प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाली विद्यालय की प्रतिभागी छात्राओं को पुरस्कृत भी किया गया। इस मौके पर डॉ. हिमांशु बौड़ाई, बिमला रावत, कमला डिमरी, शोभा रतूड़ी, कमला पंत, डॉली डबराल ज्योत्स्ना कुकरेती, कांता घिल्डियाल मौजूद रहे।