हरिद्वार में चिता की राख से किन्नरों ने खेली होली

Feb 28, 2026 02:54 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, देहरादून
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हरिद्वार में किन्नर समाज ने श्मशान की राख से होली खेली। मान्यता है कि भगवान शिव ने देवी गौरी का गौना करने के बाद इस परंपरा की शुरुआत की। किन्नरों ने चिता की राख की पूजा के बाद होली खेली, जिससे लोगों में आश्चर्य का माहौल बना। यह मोक्ष द्वार है और मेल-मिलाप का संदेश दिया गया।

हरिद्वार में चिता की राख से किन्नरों ने खेली होली

हरिद्वार। होली के रंगों के उल्लास के बीच एक ऐसी भी होली देखने को मिली जहां गुलाल अबीर की जगह श्मशान की राख के साथ साथ होली खेली गई। हरिद्वार में किन्नर समाज के लोग शमशान की राख के साथ आपस में होली खेलते है। श्मशान की राख से होली खेलने को लेकर मान्यता है कि भगवान शिव रंगभरी एकादशी के दिन देवी गौरी का गौना कराकर उनके साथ काशी पहुंचे। कहा जाता है कि भगवान शिव भूत-प्रेत, यक्ष, गंधर्व और प्रेत आदि के साथ होली नहीं खेल पाए और अगले दिन उन्होंने होली खेली, यहीं से मसान होली मनाने की परंपरा शुरू हुई।

हरिद्वार में किन्नर अखाड़े ने खड़खड़ी श्मशान घाट पर मसाने की होली खेली किन्नर समाज के लोगों ने श्मशान में चिताओं की राख और रंग से होली खेली। शमशान में चिताओं के सामने किन्नरों को होली खेलता देख लोग आश्चर्य चकित रह गए। किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर भवानी ने बताया कि पौराणिक परम्परा है जिसका वे निर्वहन कर रहे है। होली से पहले बैंड बाजे के साथ सभी किन्नर श्मशान में पहुंच चिता की राख की पहले पूजा की गई उसके उसके बाद उसी रख से होली खेली। पूनम किन्नर का कहना है कि यह मोक्ष द्वार है और सभी को एक दिन यहां आना है इसलिए सभी को इस होली पर गिले शिकवे मिटा कर मेल मिलाप से रहना चाहिए।

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