भागवत कथा से पहले सहस्त्रधारा रोड में निकाली कलश यात्रा
देहरादून में शनिधाम सहस्त्रधारा रोड पर श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ का पहला भव्य कलश यात्रा निकाला गया। महिलाएं पहाड़ी ढोल की थाप पर कीर्तन करती हुई गईं। कथा व्यास आचार्य शिवप्रसाद ममगांई ने कहा कि लौकिक सुखों की दौड़ ने मन की बैचेनी बढ़ा दी है। कई भक्त इस आयोजन में उपस्थित रहे।

देहरादून। शनिधाम सहस्त्रधारा रोड में सोमवार को श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के पहले भव्य कलश यात्रा निकाली गई। जिसमें पिछौड़ा ओढ़कर महिलाएं पहाड़ी ढोल की थाप पर कीर्तन करते हुए चले। गोविन्द जय जय गोपाल जय जय संकीर्तन गाते महिला पुरुष श्रद्धालु ग्रीन वैली सोसाइटी शिव मन्दिर से मुख्य मार्ग होते हुए कथास्थल पहुंचे। स्वस्ती वाचन के साथ कलश स्थापना हुई। कथा व्यास आचार्य शिवप्रसाद ममगांई पहले दिन की कथा में कहा कि लौकिक सुखों की दौड़ ने मन की बैचेनी बढ़ा दी है। कोई सराहना करे या निंदा दोनों अच्छे ही हैं, क्योंकि प्रशंसा प्रेरणा देती है और निंदा सावधान होने का अवसर।
मौके पर विधायक उमेश शर्मा काऊ, नन्दन सिंह बिष्ट, रेखा बिष्ट, मंजू उर्वी, शशि मुरारका, नितेश मुरारका, आचार्य रमेश उनियाल, आचार्य दिवाकर भट्ट, संदीप बहुगुणा, जितेंद्र धस्माना, हिमांशु मैठाणी, सुनील नौटियाल आदि भक्त उपस्थित रहे।
लेखक के बारे में
Shailendra Semwalशॉर्ट बायो : शैलेन्द्र सेमवाल पिछले 28 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में दैनिक हिन्दुस्तान देहरादून में सीनियर कंटेंट क्रिएटर के रुप में कार्यरत हैं।
परिचय एवं अनुभव:
पिछले 28 सालों के सफर में शैलेन्द्र सेमवाल ने प्रिंट मीडिया क्षेत्र में विविध विषयों वाले आलेख लिखे हैं। 2008 से वह हिन्दुस्तान के मसूरी सेंटर के प्रभारी रहे। उनके विषयों में इतिहास, संस्कृति, विज्ञान, शोधात्मक, विश्लेणात्मक, लाइफ स्टाइल, फैशन, फिल्म वर्ल्ड और घटनात्मक खबरें रही हैं। एक फीचर कंटेंट राइटर के रुप में उन्होंने समग्र विषयों पर लिखा है। इतिहास, आंचलिक विषयों और मुद्दों पर उनका गहन अध्ययन है।
कॅरियर का सफर
शैलेन्द्र सेमवाल ने अपने प्रिंट लेखन की शुरूआत अपने स्टडी के दौरान ही कर ली थी। 2003 में अमर उजाला देहरादून में बतौर ट्रेनी कॅरियर शुरू किया। 2004 में विकासनगर और मसूरी अमर उजाला के बतौर ब्यूरो प्रमुख काम किया। वह शिमला, पौड़ी जैसी जगहों पर अमर उजाला, जागरण और हिन्दुस्तान के लिए लिख चुके हैं। इसके अलावा अन्य प्रमुख पत्रिकाओं में भी उनका लेखन चल रहा था। 2008 में उत्तराखंड में हिन्दुस्तान लांच होने के बाद से वह हिन्दुस्तान से जुड़े हुए हैं। 2010 से देहरादून में कार्यरत हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि:
शैलेन्द्र सेमवाल ने सन 2000 में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि से एमएससी जूलोजी करने के बाद बीजे और एमजेएमसी की डिग्री हासिल की। साहित्य रंगकर्म से जुड़ाव से उनका रुझान पत्रकारिता की ओर हुआ। साहित्य, संस्कृति, मनोरंजन, इतिहास, विज्ञान जैसी बीट पर कमांड है। उनकी शोध परक अनेक लेख ऑल एडिशन, फ्रंट पेज पर प्रकाशित होते रहे हैं।
एंटरटेनमेंट और विजन
कॅरियर में आर्ट, कल्चर, एंटरटेनमेंट, राज्य की राजनीति से जुड़े विषयों पर कई सेलिब्रिटी के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू का अवसर मिला। शैलेन्द्र सेमवाल का मानना है कि पत्रकारिता में विषयों की बुनियादी समझ होना जरुरी है। लगातार गहराई से जानने की जिज्ञासा रखना ही सार्थक पत्रकारिता महत्वपूर्ण अंग है।
विशेषज्ञता:
बॉलीवुड, उत्तराखंडी फिल्म संगीत, लोककला, नृत्य, सेलिब्रिटी इंटरव्यू, किसी भी सेलिब्रिटी का उत्तराखंड कनेक्शन तलाशना, हिमालयी पर्यावरण, पारिस्थितिकी, सामाजिक मुद्दे, पर्यावरणीय आंदोलन, राज्य आंदोलन, राज्य का इतिहास, खोजपरक स्टोरी।
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