आपदा की तर्ज पर वनाग्नि के लिए भी चेतावनी तंत्र विकसित होगा
आपदा की तर्ज पर वनाग्नि के लिए भी चेतावनी तंत्र विकसित होगा मुख्य सचिव ने

प्राकृतिक आपदाओं के पूर्व चेतावनी सिस्टम की तर्ज पर जंगलों में लगने वाली आग के लिए सिस्टम तैयार किया जाएगा। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में वनाग्नि रोकथाम के लिए आयोजित बैठक में वन विभाग, मौसम विभाग और केंद्रीय संस्थान वन सर्वेक्षण को संयुक्त रूप से इसका मॉड्यूल तैयार करने के निर्देश दिए। इससे वनाग्नि की संभावनाओं का पहले ही अनुमान लगा लिए जाने से जानमाल के नुकसान को रोकने में सहायता मिलेगी।मुख्य सचिव ने सख्त रुख में कहा कि वनाग्नि की रोकथाम के लिए हर साल जनवरी के महीने के भीतर भीतर ही विभाग, विभिन्न समितियों और स्थानीय लोगों के साथ बैठकें कर अनिवार्य रूप से रणनीति तैयार कर लें।
मालूम हो कि राज्य में फायर सीजन 15 फरवरी से शुरू हो जाता है। जोकि 30 जून तक चलता है। इस वर्ष वनाग्नि से निपटने के लिए बैठकों का सिलसिला काफी विलंब से हुआ था। मुख्य सचिव ने प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर लगे फायर हाइड्रेंट्स के लिए लिए विशेष प्रेशर पाइपलाइन व्यवस्था करने के भी कहा। इसके लिए पेयजल विभाग को प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पांडेय, सीसीएफ सुशांत कुमार पटनायक, डॉ. पराग मधुकर धकाते, सी. रविशंकर, विनोद कुमार सुमन एवं रणवीर सिंह चौहान आदि मौजूद रहे।पिरूल ब्रिकेट की ज्यादा से ज्यादा यूनिट लगाएं: मुख्य सचिव ने जंगलों से पिरूल के निस्तारण और पिरुल ब्रिकेट के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास करने पर जोर दिया। कहा कि पिरुल ब्रिकेट को ईंधन के विकल्प के तौर पर स्थापित करने के लिए प्रदेश में अधिक से अधिक यूनिट लगाने का प्रयास किया जाए। इससे वनाग्नि को रोकने में सहायता मिलेगी, वहीं दूसरी ओर वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता बढ़ेगी। स्वयं सहायता समूहों की आर्थिकी को भी सुधारने में मदद मिलेगी। इसे कार्बन क्रेडिट से भी जोड़ा जा सकता है।
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