उत्तराखंड के पारम्परिक खेल और साहित्य हमारी धरोहर
फोटो देहरादून, वरिष्ठ संवाददाता। दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की ओर से सोमवार को साहित्यकार एवं शोधकर्ता डॉ. सुरेन्द्र दत्त सेमल्टी की दो कृतियों ‘उत

दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की ओर से सोमवार को साहित्यकार एवं शोधकर्ता डॉ. सुरेन्द्र दत्त सेमल्टी की दो कृतियों ‘उत्तराखंड का पारम्परिक बाल साहित्य’ तथा ‘उत्तराखंड के पारम्परिक बाल मनोरंजन व खेल’ पर एक विशेष परिचर्चा हुई। बाल मनोविज्ञानी अंबरीश बिष्ट ने कहा कि उत्तराखंड के पारम्परिक समाज में बच्चों का जीवन प्रकृति, लोकसंस्कृति, परिवार और सामुदायिक जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है। डॉ.सेमल्टी ने कहा कि राज्य के पारम्परिक खेल और साहित्य का संरक्षण जरुरी है। साहित्यकार महाबीर रवांल्टा ने कहा कि डॉ. सेमल्टी ने अपने व्यापक अध्ययन, क्षेत्रीय भ्रमण से उन पारम्परिक खेलों, लोकगीतों और बाल साहित्यिक परम्पराओं का संकलन किया है, जो समय के साथ विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रही हैं।
प्रो. अल्का मोहन शर्मा, प्रो. गुड्डी बिष्ट, रानू बिष्ट, रमाकांत बेंजवाल, ओमप्रकाश सेमवाल, कांता घिल्डियाल, बीना बेंजवाल, चंद्रशेखर तिवारी, प्रवीन भट्ट, देवेन्द्र कांडपाल, कल्याण बुटोला, डॉ. डीके पाण्डे, डॉ. लालता प्रसाद, डॉ. इन्द्रजीत सिंह उपस्थित रहे।
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