आज से नहाए खाए के साथ व्रत की शुरुआत, मिट्टी के चूल्हे में बन रहा प्रसाद

आज से नहाए खाए के साथ व्रत की शुरुआत, मिट्टी के चूल्हे में बन रहा प्रसाद

संक्षेप:

देहरादून में छठ पर्व आज से नहाए-खाए के साथ शुरू हो रहा है। यह चार दिवसीय पर्व 28 अक्टूबर को ऊषा अर्घ्य के साथ संपन्न होगा। प्रशासन ने पर्व की तैयारियों के लिए विभिन्न अधिकारियों की ड्यूटी लगाई है।...

Oct 25, 2025 12:20 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, देहरादून
share

देहरादून। छठ पर्व आज यानी शनिवार से नहाए-खाए के साथ शुरू हो रहा है। यह चार दिवसीय पर्व 28 अक्तूबर (मंगलवार) को ऊषा अर्घ्य के साथ संपन्न होगा। बिहारी महासभा ने बताया कि छठ की शुरुआत नहाए खाए से होती है। नहाए खाने में सबसे पहले महिलाएं जल तत्व का सेवन करती है। इसके तहत वह जल से भरे हुए सब्जी का सेवन करते हैं। दूसरे दिन खरना के समय चावल और गुड़ का सेवन किया जाता है। गुड़ एक अग्नि तत्व होता है और तीसरे दिन निर्जल उपवास रखकर जल तत्व का सेवन करते हैं। चौथे दिन भोर में अर्घ्य के दौरान वह वायु तत्व का अनुसरण करती है।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

इस प्रकार पांच तत्व के साथ महिलाएं इस व्रत को करती हैं। वहीं, प्रशासन ने छठ पर्व को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम सदर, एसडीएम विकासनगर समेत चार अफसरों की ड्यूटी लगाई है। छठ पर्व की तैयारियों को एडीएम केके मिश्रा, एसडीएम विनोद, एसडीएम अपूर्वा आदि ने प्रेमनगर समेत विभिन्न घाटों का निरीक्षण किया। एडीएम ने छठ पर्व की तैयारियों को लेकर अफसरों से जानकारी ली। एडीएम केके मिश्रा ने बताया कि एसडीएम सदर प्रेमनगर क्षेत्र, एसडीएम विनोद विकासनगर क्षेत्र, एसडीएम अपूर्वा टपकेश्वर क्षेत्र और सिटी मजिस्ट्रेट चंदब्रनी क्षेत्र कीव्यवस्थाएं संभालेंगे। प्रशासन की ओर से हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। बिहारी महासभा के सचिव चंदनकुमार झा ने बताया कि टपकेश्वर मंदिर तमसा नदी के प्रांगण में कद्दू, भात प्रसाद की व्यवस्था की गई। सभी सदस्य नहाए खाए प्रसाद वहीं पर ग्रहण करेंगे, क्योंकि व्रतियों में दिन में कद्दू की सब्जी और चावल खाकर पूजा की शुरुआत होती है। सभी घाटों पर साज सज्जा, सफाई व लाइट की व्यवस्था में लगे हैं। यह है मान्यता मान्यता है कि पुत्र प्राप्ति के लिए व्रती का खरना का व्रत करना फलदायी होता हैं और इस प्रसाद को आस्था के साथ ग्रहण करते हैं। तीसरे दिन वर्ती शाम को घाट पर जाती हैं और आखिरी दिन उगते हुए सूरज की पूजा विधि विधान से करने के बाद, प्रसाद ग्रहण कर छठ पर्व का समापन किया जाता है।