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हिमाचल-असम की संस्कृति का दिखा संगम

हिमाचल-असम की संस्कृति का दिखा संगम

संक्षेप:

राज्य स्थापना दिवस समारोह ‘निनाद 2025’ का चौथा दिन हिमालयी रंगों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से भरा रहा। कार्यक्रम में हिमाचल और असम की पारंपरिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। कलाकारों को सम्मानित किया गया और हिमालयी हाट में पारंपरिक व्यंजन और हस्तशिल्प ने आकर्षण बढ़ाया। एक अभिलेख गैलरी ने आंदोलन की यादों को जीवंत किया।

Tue, 4 Nov 2025 06:55 PMNewswrap हिन्दुस्तान, देहरादून
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राज्य स्थापना दिवस समारोह ‘निनाद 2025’ का चौथा दिन मंगलवार को हिमालयी रंगों और सांस्कृतिक सुरों से सराबोर रहा। गढ़ी कैंट स्थित हिमालयन संस्कृति केंद्र में सुबह का सत्र हिमाचल प्रदेश और असम की पारंपरिक प्रस्तुतियों से गुलजार रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तराखंड साहित्य एवं सांस्कृतिक परिषद की अध्यक्ष मधु भट्ट और संस्कृति निदेशालय के उपनिदेशक आशीष कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। हिमाचल के कांगड़ा से आई सरस्वती सुर समिति ने शिव स्तुति और लोकगीतों से कार्यक्रम की शुरुआत की। लोकनृत्य और गीतों ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा।असम की संस्कृति का रंग रंधाली ग्रुप की प्रस्तुतियों से बिखरा।

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कृष्ण वंदना और बिहू नृत्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। पारंपरिक असमिया पोशाक, लोक वाद्य ‘मीहू ढोल’ और बांस के फूंक वाद्यों ने वातावरण को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया। परिषद की अध्यक्ष मधु भट्ट ने कलाकारों को शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। हिमालयी हाट में स्वाद और शिल्प का संगम हिमालयी हाट में पारंपरिक व्यंजनों और हस्तशिल्प के स्टाल आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। हिमाचल के हमीरपुर से आई अनमोल स्वयं सहायता समूह की महिलाएं पारंपरिक ‘सिड्डू’ व्यंजन परोस रही हैं। अखरोट की चटनी के साथ परोसा जाने वाला यह पौष्टिक व्यंजन लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। अभिलेख गैलरी बनी आंदोलन की यादों का दस्तावेज़ ‘निनाद 2025’ में इस वर्ष एक अनोखी पहल के तहत राज्य अभिलेखागार द्वारा तैयार उत्तराखंड आंदोलन अभिलेख गैलरी ने लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। इसमें आंदोलन के दौर की दुर्लभ तस्वीरें, दस्तावेज, पत्राचार और समाचार रिपोर्टें प्रदर्शित की गईं, जो राज्य निर्माण की संघर्षगाथा को जीवंत करती हैं। राज्य अभिलेखागार के निदेशक आशीष कुमार ने बताया कि महानिदेशक युगल किशोर पंत की प्रेरणा से तैयार यह गैलरी न केवल इतिहास को देखने का अवसर देती है, बल्कि उसे सहेजने की चेतना भी जगाती है। विशेषज्ञ मनोज जखमोला, विनोद सिंह पंवार, जगदीश बोरा और सुशील कुमार आगंतुकों को दस्तावेजों के संरक्षण की तकनीक से अवगत करा रहे हैं।