
गरीबी-अमीरी में भी आनन्द नहीं, संतोष में ही आनन्द है :आचार्य सौरभ सागर
फोटो देहरादून, वरिष्ठ संवाददाता। जैन आचार्य सौरभ सागर महामुनिराज के मंगल सानिध्य में बुधवार
जैन आचार्य सौरभ सागर महामुनिराज के मंगल सानिध्य में बुधवार को पंचायती दिगम्बर जैन मंदिर गांधी रोड में दसलक्षण पर्व के उत्तम तप धर्म पर श्रीजी की पूजा अर्चना की गयी। 31 वां श्री पुष्पवर्षा योग समिति एवं सकल दिगम्बर जैन समाज के आयोजन में आचार्य श्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि इच्छा का दमन करना तप है। तप चार आराधनाओं में प्रधान है। जैसे स्वर्ण को तपाने से वह समस्त मैल छोड़कर शुद्ध हो जाता है, उसी प्रकार आत्मा भी बारह प्रकार के तपों के प्रभाव से शुद्ध हो जाती है। उन्होंने कहा कि कर्म निर्जरा के लिए जो तप जाये वो ही तप धर्म कहलाता है।

जो सम्बन्ध बनाये जाते हैं वो दुःखदाई हैं। बड़ी वस्तु यदि छोटी से आकर्षित होती है तो वह विनाशकारी है। हम एक-दूसरे के गुण व दोष देखते हैं पर आज का दिन कहता है कि स्वयं के गुण व दोष देखो। दूसरे को देखना छोड़ स्वयं में गुण पैदा करो यही उत्तम तप धर्म है। संयमितः तप्यते इति तपः अर्थात् संयम के लिए। आचार्य कहते हैं कि व्यवस्था नहीं, अवस्था सुधारो, व्यवस्था अपने आप ही सुधर जायेगी। उन्होंने कहा जो अवगुण देखने में लगा है उसको गुण नहीं दिखते, जिसे गुण दिखते हें उसको अवगुण दिखते ही नहीं। दूसरों में अच्छाईयां देखना सरल है लेकिन अपने में अच्छाई देखना बहुत कठिन है। आनन्द त्याग में नहीं समता में है, गरीबी-अमीरी में भी आनन्द नहीं, संतोष में ही आनन्द है। मौके पर विधानाचार्य संदीप जैन सजल और संगीतकार केशव एंड पार्टी भोपाल ने गुरु भक्ति की महिमा का बखान किया। जैन भवन में सुबह दैनिक चर्चा, गुरु वंदना, श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा, नित्य नियम पूजन, आहार चर्या, शंका समाधान, गुरु भक्ति प्रतिक्रमण, आरती एवं शास्त्र सभा की हुई। वर्णी जैन विद्यालय के छात्रों ने दी भावपूर्ण प्रस्तुति संध्याकालीन बेला में श्री वर्णी जैन इंटर कॉलेज के बच्चों के द्वारा धार्मिक भजनों पर बहुत सुंदर व भावपूर्व प्रस्तुति दी गई। दीप प्रज्जवलन से कार्यक्रम की शुरूआत हुई। नमोकार मन्त्र प्रथम सूर्य है, आदि जिनेश्वर, आदिनाथ भगवान नृत्य प्रस्तुत किए गए। तत्पश्चात मंगलाचरण एवं स्वागत नृत्य, आओ बच्चों मिलकर पाठशाला आना., जैन धर्म को मिलाकर प्री प्राइमरी छात्र-छात्राओं ने देश मक्ति नृत्य तेरा हिमालय आकाश फूले, बहती रहे गंगा.., कक्षा दस, ग्यारह और बारहवीं के छात्रों ने मंशापूर्ण महावीर स्वामी का स्तुति भजन लागी लागी रे लगन प्रभु नाम की..,प्राइमरी के छात्रों की नृत्य प्रस्तुति नगरी नगरी धन्य बनी.., सीनियर छात्राओं द्वारा गरबा नृत्य, वन्दे भारत वन्दना सिर पर हिमालय का छत्र है.. प्रस्तुत किया गया। प्रधानाचार्या ने विद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की।

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