वैश्विक समस्याओं को मिलकर हल करना हर देश की प्राथमिकता: आनंद वर्धन
देहरादून में 'रिसर्च एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज' और दून विश्वविद्यालय के सहयोग से ब्रिक्स अकादमिक मध्य-अवधि सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य सचिव आनंद वर्धन द्वारा हुआ। यह सम्मेलन लचीलेपन और स्थिरता पर केंद्रित है, जिसमें हरित औद्योगिक परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु वित्त के विषयों पर चर्चा होगी।

देहरादून। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन, 'रिसर्च एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज' और दून विश्वविद्यालय के सहयोग से देहरादून में ब्रिक्स अकादमिक मध्य-अवधि सम्मेलन दून विवि में शुक्रवार को शुरू हुआ। मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने सम्मेलन का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी उत्तराखंड को मिलना बड़ा अवसर है। उम्मीद है कि यहां निकले निष्कर्ष ग्लोबल स्तर पर सुझाव के रूप में शामिल किए जाएंगे।राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने अपना वीडियो संदेश दिया। विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव व भारत सरकार के ब्रिक्स शेरपा शंभू एल. हक्की ने बताया कि ब्रिक्स देशों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाते हुए यह सम्मेलन लचीलेपन और स्थिरता पर केंद्रित है, जो भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण को दर्शाता है।
सम्मेलन में तीन विषयगत सत्र रखे गए हैं, जो खंडित वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच हरित औद्योगिक परिवर्तन; स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण और एक न्यायसंगत हरित संक्रमण के लिए जलवायु वित्त को बढ़ाने पर केंद्रित हैं। यदि ब्रिक्स देश सामूहिक निष्कर्षों पर पहुंच पाते हैं, तो व्यापक विश्व भी साझा समाधानों की ओर आगे बढ़ सकता है। गंभीर चुनौती ब्रिक्स अकादमिक मध्य-अवधि सम्मेलन से यह उम्मीद है कि वह पर्यावरण संरक्षण को आर्थिक विकास के साथ जोड़ने के लिए एक रोडमैप तैयार करे जो भारत के ब्रिक्स एजेंडे को समर्थन प्रदान करेगा।
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