ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News उत्तराखंड देहरादूनपेयजल के राजकीयकरण को 27 फरवरी को विधानसभा का घेराव

पेयजल के राजकीयकरण को 27 फरवरी को विधानसभा का घेराव

विधानसभा घेराव से पहले 23 और 24 फरवरी को प्रदेश स्तर पर होंगे धरने जल

पेयजल के राजकीयकरण को 27 फरवरी को विधानसभा का घेराव
हिन्दुस्तान टीम,देहरादूनWed, 21 Feb 2024 07:30 PM
ऐप पर पढ़ें

विधानसभा घेराव से पहले 23 और 24 फरवरी को प्रदेश स्तर पर होंगे धरने
जल निगम जल संस्थान संयुक्त मोर्चा ने शासन पर लगाया अनदेखी का आरोप

देहरादून, मुख्य संवाददाता।

पेयजल के राजकीयकरण को लेकर पूर्व में दिए गए आश्वासन पर अभी तक कोई कार्रवाई न होने पर जल निगम, जल संस्थान संयुक्त मोर्चा ने गहरी नाराजगी जताई। मोर्चा की बैठक में 27 फरवरी को विधानसभा का घेराव और उससे पहले 23 और 24 फरवरी को प्रदेश स्तर पर धरना देने का कार्यक्रम तय किया गया।

कमला नगर संघ भवन में हुई बैठक में संयोजक रमेश बिंजौला, विजय खाली ने कहा कि पूर्व में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ हुई बैठक में तय हुआ था कि पेयजल कर्मचारियों के राजकीयकरण पर जल्द फैसला लिया जाएगा। इसी आश्वासन के बाद हड़ताल को स्थगित किया गया। इसके बावजूद इस बैठक के बाद शासन स्तर पर कुछ भी प्रगति नहीं हुई। राजकीयकरण पर फैसला होना तो दूर फाइल अनुभाग तक से आगे नहीं बढ़ पाई। शासन स्तर से लगातार अनदेखी की गई।

श्याम सिंह नेगी ने कहा कि अफसरों की इस तरह की लापरवाही सरकार की छवि को प्रभावित कर रही है। सीएम के आदेशों पर भी तेजी नहीं दिखाई जा रही है। इसके विरोध में कर्मचारियों को मजबूर होकर नए सिरे से आंदोलन खड़ा करना पड़ रहा है। 23 फरवरी को जल निगम और 24 फरवरी को जल संस्थान मुख्यालय में धरना दिया जाएगा। प्रदेश स्तर पर भी आंदोलन खड़ा किया जाएगा। 26 फरवरी को प्रदेश भर से कर्मचारी देहरादून के लिए कूच करेंगे। 27 फरवरी को बजट सत्र में विधानसभा का घेराव कर विरोध जताया जाएगा। बैठक में डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ अध्यक्ष गौरव बर्त्वाल, जितेंद्र सिंह देव, लक्ष्मी नारायण भट्ट, रामचंद्र सेमवाल, संदीप मल्होत्रा, धन सिंह, शिशुपाल रावत, पीएस नेगी, जीवानंद भट्ट, सुभाष सल्होत्रा, संदीप कोठारी मौजूद रहे।

सचिव ने भी लगाई फटकार

पेयजल के राजकीयकरण को लेकर फाइल तैयार न होने पर सचिव पेयजल अरविंद सिंह हंयाकी ने भी एक सिरे से निचले अफसरों को फटकार लगाई। इस फटकार का असर ये हुआ कि शाम तक न सिर्फ फाइल दौड़ने लगी, बल्कि हर टेबल पर हलचल की स्थिति रही। कर्मचारियों की हड़ताल की चेतावनी से शासन स्तर पर शाम होते होते हरकत भी नजर आई।

शहरी विकास के खिलाफ खोला मोर्चा

संयुक्त मोर्चा ने शहरी विकास के खिलाफ भी मोर्चा खोला। पदाधिकारियों ने कहा कि अभी तक पेयजल, सीवरेज के काम शहरी विकास की एजेंसी से पेयजल एजेंसियों को वापस नहीं लौटाए गए हैं। जबकि पेयजल की ओर से बकायदा डिवीजनवार पूरा ब्यौरा शहरी विकास को सौंप दिया गया है। काम लौटाने की बजाय अमृत के काम भी पेयजल से वापस लेने की साजिश रची जा रही है। ऐसा कोई भी आदेश होने पर बिना किसी पूर्व सूचना के आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।

यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें