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3 दिसंबर, 2020|3:56|IST

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हौसले को सलाम : इस खास मकसद के लिए पैदल यात्रा पर निकला ये युवा इंजीनियर

दिल्ली के युवा इंजीनियर आशीष शर्मा का हौसला देखने लायक है। पैदल यात्रा पर निकले इस युवा इंजीनियर का मकसद देश में बच्चों के भीख मांगने की प्रवृति को खत्म करना है। वह गांव और शहरों में बच्चों को बाल भिक्षावृत्ति रोकने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।  

सड़कों पर भीख मांगते बच्चों को इस कार्य से दूर करने और उन्हें अच्छे रास्ते की ओर अग्रसर करने को लेकर लम्बे समय से दिल्ली के युवा इंजीनियर आशीष शर्मा देश के विभिन्न राज्यों की पैदल यात्रा पर निकले हैं। वह बाल भिक्षावृत्ति के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं। रुद्रप्रयाग पहुंचने पर उन्होंने बताया कि कई लोग बच्चों को पैसे देकर उन्हें दया का पात्र बनाते हैं। धीरे-धीरे यह बच्चे भीख मांगने के आदि हो जाते हैं। भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए सरकारी स्तर पर कोई गंभीर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में बच्चे भीख मांगते दिख रहे हैं। आशीष के मुताबिक वह 6वीं कक्षा से ही वृद्धाश्रम जा रहे हैं। इससे उन्हें अहसास हो गया कि इस समस्या की जड़ बच्चों में ही है। अगर बच्चे ही खुश नहीं होंगे तो बुजुर्ग कैसे सुखी रह सकेंगे। 

मैकेनिकल इंजीनियर आशीष ने 22 अगस्त 2017 से पूरे देश में पदयात्रा निकाले हैं। आशीष अब तक पहले चरण में 4219 किलोमीटर से ज्यादा चल चुके हैं। दुआएं फाउंडेशन के तहत 17 हजार किमी की पदयात्रा को आशीष ने उन्मुक्त भारत का नाम दिया है। इस अभियान के तहत देश के सभी राज्यों व केंद्र शासित राज्यों के 4900 गांवों में बाल भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए जागरूक किया जाएगा। आगामी 14 जून 2018 को उन्मुक्त दिवस मनाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में चंपावत, लोहाघाट, पिथौरागढ़ होते हुए वह रुद्रप्रयाग पहुंचे। 3 मई को देहरादून पहुंचेगे। अभी तक वह जम्मू, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गोवा, दमन, सिलवासा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश का सफर तय कर चुके हैं।

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  • Web Title:Ashish Sharma is traveling on foot to prevent children from begging