अकेलेपन ने ले ली जान; देहरादून के धनंजय को मौत के बाद भी अपनों का इंतजार, कहानी कर देगी भावुक

अंकित कुमार चौधरी, देहरादून, हिन्दुस्तान
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देहरादून के धनंजय की मौत समाज के खोखलेपन की गवाही दे रहा है। यह दरकते रिश्तों और बदलते समाज की कड़वी तस्वीर है। धनंजय अपनी बूढ़ी मां का इकलौता सहारा थे। मां की मौत के बाद अकेलेपन ने उनकी जान ले ली।

अकेलेपन ने ले ली जान; देहरादून के धनंजय को मौत के बाद भी अपनों का इंतजार, कहानी कर देगी भावुक

Dehradun Viral News: देहरादून के डालनवाला का गुरुद्वारा रोड अमूमन चहल-पहल से भरा रहता है, लेकिन वहां स्थित एक घर के भीतर पसरा मौन अब चीख-चीखकर समाज के खोखलेपन की गवाही दे रहा है। 60 वर्षीय धनंजय सिंह राणा अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनकी मृत्यु सिर्फ एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि दरकते रिश्तों, बदलते समाज की भी एक तस्वीर है। घर में अकेले दम तोड़ने वाले धनंजय का शव अब अपनों के इंतजार के लिए कोरोनेशन अस्पताल में रखा गया है। हालांकि इसमें उम्मीद कम कानूनी प्रक्रिया ज्यादा है।

धनंजय के लिए उनकी मां ही उनका पूरा संसार थीं, लेकिन दो महीने पहले जब मां का साया सिर से उठा, तो धनंजय का जैसे संसार ही उजड़ गया। धनंजय का पड़ोसियों से मधुर संबंध था और माता के निधन के बाद पड़ोसी ही उन्हें खाना देते थे। सोमवार को जब धनंजय खाने के लिए नहीं उठे तो पड़ोसियों ने जाकर देखा तब पता चला अकेलेपन उन्हें हमेशा के लिए खा चुका था। मां के पीछे-पीछे वह भी चल दिए।

मां ही पूरी दुनिया थी

धनंजय के पिता हर नाथ सिंह राणा वायुसेना से सेवानिवृत्त थे। सालों पहले पिता के निधन के बाद से मां की पेंशन और उनका साथ ही धनंजय के जीने का आधार था। धनंजय ने शादी की या नहीं आसपड़ोस के लोग भी सही नहीं बता पाए, लेकिन मां से उन्हें बड़ा प्रेम था यह सब जानते हैं।

मां की अर्थी भी पड़ोसियों की मदद से उठी थी

विडंबना देखिए जब मां की अर्थी उठी, तब भी कोई 'अपना' कंधा देने नहीं आया। उस वक्त भी पड़ोसियों ने ही इंसानियत का धर्म निभाया था। आज जब धनंजय खुद मौत की आगोश में सो गए हैं, तब भी उनके मोबाइल की कॉन्टैक्ट लिस्ट में ऐसा एक भी नाम नहीं मिला जिसे 'करीबी' कहा जा सके।

अब धनंजय का कुत्ता अकेला रह गया

धनंजय अकेले जरूर थे, पर निष्ठुर नहीं। उनके छोटे से संसार में एक पालतू कुत्ता था, जो शायद उनकी खामोशी का सबसे बड़ा गवाह था। आज जब धनंजय का पार्थिव शरीर मोर्चरी में अपनों का इंतजार कर रहा है, वह बेजुबान जानवर भी उदास है। एक पड़ोसी ने अब कुत्ते को साथ रखा।

फोन में नंबर बहुत थे लेकिन अपना कोई नहीं

करनपुर चौकी प्रभारी एसआई विक्की टम्टा और उनकी टीम ने फोन के हर नंबर को खंगाला, पर हर तरफ से 'परायापन' ही हाथ लगा। फिलहाल शव कोरोनेशन अस्पताल में रखा है। पुलिस तीन दिन तक किसी 'सगे' का इंतजार करेगी, जिसके बाद पड़ोसी ही धनंजय को मुखाग्नि देंगे।

Gaurav Kala

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गौरव काला: वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम सदस्य

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