खामेनेई को याद कर रो पड़े शिया मुसलमान, सरकार से ईरान में फंसे भारतीयों को वापस लाने की अपील

Mar 02, 2026 03:25 pm ISTGaurav Kala चांद मोहम्मद, देहरादून, हिन्दुस्तान
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जब से अमेरिका-इजरायल हमलों में ईरान के सुप्रीमो खामेनेई की मौत की खबर मिली है, देहरादून के शिया मुसलमानों में मातम पसरा हुआ है। देहरादून में शिया मुसलमानों ने दो जगहों पर मजलिस का आयोजन कर खामेनेई को याद किया।

खामेनेई को याद कर रो पड़े शिया मुसलमान, सरकार से ईरान में फंसे भारतीयों को वापस लाने की अपील

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर से उत्तराखंड के शिया मुसलमानों में मातम है। समुदाय ने उन्हें शहीद करार देते हुए अमेरिका और इजरायल को जमकर कोसा। शोकसभाएं (मजलिस) आयोजित कर खामेनेई को श्रद्धांजलि दी गई। गम में लोगों के आंसू छलक पड़े। मुस्लिम संगठनों और संयुक्त नागरिक संगठन ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों की हत्या करार दिया है। समुदाय ने ईरान और अरब में फंसे भारतीयों को वापस लाने की अपील की है।

देहरादून ईसी रोड स्थित इमामबारगाह एवं मस्जिद में अंजुमन मोईनुल मोमिनीन की ओर से मजलिस आयोजित की गई। इमाम मौलाना शहंशाह हुसैन जैदी ने तकरीर की। कहा कि खामेनेई की शहादत खाली नहीं जाएगी, ईरान इसका माकूल जवाब देगा और हक की जीत होगी।

शिया मुसलमानों के घर-घर में मातम का माहौल

वहीं, इंदर रोड स्थित इमामबारगाह में मौलाना रिवायत अली और मौलाना रजा शाह कुम्मी ने तकरीर की। कहा कि उनकी शहादत को सदियों तक याद रखा जाएगा, जिन्होंने इमाम हुसैन की तरह वक्त के यज़ीद (अत्याचारी) के सामने घुटने नहीं टेके। इस खबर से घर-घर में मातम का माहौल है और लोगों को आशूरा के दिन जैसा अहसास हो रहा है।

अंतरराष्ट्रीय कानूनों की उड़ाई जा रही धज्जियां: नायब शहर काजी

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के प्रदेश अध्यक्ष व नायब शहर काजी (अहले सुन्नत) पीर सैयद अशरफ हुसैन कादरी ने कहा कि खामेनेई का दुनिया से जाना पूरी मिल्लत-ए-इस्लामिया के लिए एक अजीम नुकसान है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और इजरायली पीएम नेतन्याहू को जालिम हुक्मरान बताया और कहा कि इन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ा दी हैं।

अरब और ईरान से भारतीयों की घरवापसी की अपील

उन्होंने भारत सरकार से अरब और ईरान में रह रहे भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाने की व्यवस्था करने की अपील की। संयुक्त नागरिक संगठन के सचिव सुशील त्यागी ने अमेरिकी-इजरायली हमले की कड़ी भर्त्सना की। कहा कि अमेरिका के शासकों को इंसानी जिंदगियों से कोई वास्ता नहीं है और वे लाशों के ढेर पर अपनी दादागिरी दिखा रहे हैं। इस नरसंहार के खिलाफ अपनी आवाज उठानी चाहिए।

खाड़ी देशों में फंसे प्रियजनों की चिंता

ईरान-इजरायल जंग के बीच इंटरनेट सुविधा ठप होने की वजह से ईरान में रह रहे भारतीयों से परिजनों का संपर्क टूट गया है। उत्तराखंड से भी परिजन लगातार उनकी खैरियत जानने को फोन कर रहे हैं, लेकिन फोन नहीं लग रहा है, जिससे परिजनों की चिंताएं बढ़ रही है और हर पल इंतजार में है कि वहां से कोई फोन आएगा। अभी केवल सोशल मीडिया, टीवी से मिल रही जानकारियों पर निर्भर है।

ईरान में फंसी भांजी को याद कर भावुक हुए मौलाना रजा शाह

डालनवाला में रहने वाले मौलाना रजा शाह कुम्मी बताते हैं कि उनकी भांजी आसिया बतूल ईरान के मसद और भतीजा मोहम्मद रब्बानी कुम में पढ़ाई कर रहे हैं। भांजी डेढ़ साल और भतीजा पांच साल से वहां रह रहा है। भांजी अमरोहा एवं भतीजा सहारनपुर से ईरान में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। दोनों से शनिवार को दिन में बात हुई थी, उन्होंने आखिरी बार बात में यही बताया था कि कुम, तेहरान के आसपास समेत अन्य इलाकों में हमले हुए हैं। अब इंटरनेट बंद हो रहा है और यूनिवर्सिटी से बाहर जाने को मना कर दिया गया है। अब फोन पर बात मुश्किल होगी। अब तक उनका फोन नहीं लगा है, क्योंकि नेटवर्क नहीं है। कुम्मी ने बताया कि शनिवार देर रात एक बजे एक मैसेज उनकी तरफ से आया था कि यहां हालात बेहद खराब है, दुआ कीजिएगा। रविवार को भी पूरे दिन फोन पर संपर्क नहीं हो सका है।

बेटे को बार बार बार फोन मिला रहे मौलाना रिवायत

चूना भट्टा के मौलाना रिवायत अली के बेटे वहाब कुम में पढ़ते हैं। वह आठ साल से वहां पर है। शनिवार को ही फोन पर उन्होंने हमले की जानकारी दी थी, उसके बाद से संपर्क नहीं हुआ है। मौलाना रिवायत बार बार बेटे के हाल जानने के लिए फोन उठाते हैं और मिलाते है तो नेटवर्क क्षेत्र से बाहर ही आता है, मौलाना मायूस हो जाते हैं। कहते हैं कि देर रात तक फोन किया, फिर सहरी में भी लगाया। रविवार को भी कई बार प्रयास किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका है। रोजे रख रहे हैं, नमाज में ईरान में सलामती की दुआएं की जा रही है।

बहन से दो दिन से संपर्क नहीं, जैबुन गमगीन

दून की दीपलोक कॉलोनी की जैबुन जैदी की बहन हुमा जैदी हरदोई से अपने पति मौलाना अफरोज जैदी और दो छोटे बच्चों के साथ रहते हैं। वह एक विवि में पढ़ाते हैं। रूंधे गले से बताती है कि शुक्रवार को ही बात हुई थी, शनिवार को हमले हो गए, उसके बाद इंटरनेट बंद हो गए। अब उसके बाद से संपर्क नहीं हो पा रहा है। फोन नहीं लग रहा है। मैसेज भी नहीं जा रहा है। पता नहीं किस हाल में वहां होंगे।

रियाद और दोहा में हालात सामान्य

सऊदी के रियाद में दून के समद ने बताया कि स्कूल कॉलेज फिलहाल यहां बंद है। बाजार खुले हैं, हालात सामान्य बने हैं। आजाद कॉलोनी के मौलाना अहमद के भाई मौलाना नूर मोहम्मद मजाहिरी कतर के दोहा में इमामत करते हैं। बताया कि हालात सामान्य बने हैं। जमीयत उलमा ए हिंद के नगर उपाध्यक्ष मौलाना रागिब मजाहिरी ने सऊदी, कुवैत एवं दुबई में अपने कई परिचितों से वार्ता कर उनका हाल जाना। वहीं मुस्लिम सेवा संगठन के अध्यक्ष नईम कुरैशी, उपाध्यक्ष आकिब कुरैशी भी लगातार वार्ता कर रहे हैं।

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