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कफ सिरप की ओवरडोज से कोमा में गई 3 साल की मासूम, डॉक्टरों ने बचाई जान

कफ सिरप की ओवरडोज से कोमा में गई 3 साल की मासूम, डॉक्टरों ने बचाई जान

संक्षेप:

देहरादून में एक 3 साल की बच्ची गर्विका को स्थानीय डॉक्टर ने 4 साल से ऊपर के बच्चों के लिए निर्धारित सिरप की ओवरडोज दे दी, जिससे बच्ची कोमा में चली गई, हालांकि 12 दिन अस्पताल में भर्ती रहने के बाद डॉक्टरों ने उसकी जान बचा ली।

Dec 12, 2025 07:31 am ISTAnubhav Shakya लाइव हिन्दुस्तान, देहरादून
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तीन साल की बच्ची को एक डॉक्टर ने ऐसे सिरप का परामर्श दे दिया, जो चार साल से ऊपर के बच्चों को दिया जाता है। बच्ची को इसकी ओवरडोज 40 से 50 एमएल दे दी गई। इससे बच्ची की हालत बिगड़ गई और वह कोमा में चली गई। तीन दिन श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल एवं नौ दिन दून अस्पताल के पीकू वार्ड में भर्ती रहने के बाद बच्ची को नई जिंदगी मिली।

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दून अस्पताल में चार दिन बच्ची को वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। यह खबर उन परिजनों को भी अलर्ट करती है, जो खुद ही बच्चों को दवाई देते हैं या इंटरनेट एवं झोलाछाप के माध्यम से इलाज कराते हैं। दून अस्पताल के एमएस डॉ. आरएस बिष्ट ने बताया कि 29 नवंबर को भगवानपुर में तीन साल की बच्ची गर्विका को खांसी, बुखार, जुकाम के चलते परिजनों ने एक स्थानीय डॉक्टर को दिखाया। बच्ची को डेक्सामिथार्पन सिरप का परामर्श दिया और बच्ची को 40 से 50 एमएल डोज दे दी गई, जो ओवरडोज होने की वजह से हालत बिगड़ गई। परिजन रुड़की के एक अस्पताल एवं बाद में श्रीमहंत इन्दिरेश अस्पताल लेकर गए। तीन दिन इन्दिरेश में भर्ती रही, दो दिसंबर को दून अस्पताल में बच्ची को लाया गया। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. तन्वी सिंह, डॉ. आयशा इमरान, डॉ. आस्था भंडारी, डॉ. कुलदीप की टीम के अधीन भर्ती किया गया। दस दिसंबर को हालत सामान्य होने पर डिस्चार्ज किया गया।

तीन साल की बच्ची को कैसे दिया डेक्सामिथार्पन सिरप?

एमएस डॉ. आरएस बिष्ट ने बताया कि डेक्सामिथार्पन सिरप चार साल तक के बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को नहीं देना होता है। किसी स्थानीय डॉक्टर ने सिरप के लिए परामर्श दिया और परिजनों ने उसकी ओवरडोज दे दी। इससे पूरा नर्व सिस्टम चोक हो गया और बच्ची कोमा में चली गई। डॉक्टरों एवं स्टाफ ने काफी मेहनत एवं जद्दोहद कर बच्ची को मौत के मुंह से बाहर लाए।

झोलाछाप से इलाज खतरनाक

एचओडी पीडिया डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि बच्चों की तबीयत खराब होने पर बाल रोग विशेषज्ञ को ही दिखाना चाहिए। झोलाछाप के चक्कर में पड़कर या खुद मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर देने से नुकसान हो सकता है। इसीलिए परिजनों को अलर्ट रहने की जरूरत है।

Anubhav Shakya

लेखक के बारे में

Anubhav Shakya
भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद जी न्यूज से करियर की शुरुआत की। इसके बाद नवभारत टाइम्स में काम किया। फिलहाल लाइव हिंदुस्तान में बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। किताबों की दुनिया में खोए रहने में मजा आता है। जनसरोकार, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में गहरी दिलचस्पी है। एनालिसिस और रिसर्च बेस्ड स्टोरी खूबी है। और पढ़ें

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