लेंसकार्ट शोरूम पहुंचे बजरंग दल के लोग, कलावा बांधकर लगाया तिलक; धमकी भी दी... VIDEO
Lenskart Controversy: सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे वीडियो में ये लोग धमकी देते हुए भी नजर आए। लेंसकार्ट कंपनी बंद करो। बंद करो। चेतावनी देते हुए कहा- माफी मांगो, नहीं तो… इस मामले में आप सांसद संजय सिंह ने हमलावर होते हुए बजरंग दल और भाजपा पर निशाना साधा है। जानिए क्या है पूरा मामला।

Lenskart Controversy: उत्तराखंड के देहरादून में बजरंग दल के कार्यकर्ता लेंसकार्ट के एक शोरूम में पहुंचे और वहां मौजूद कर्मचारियों के माथे पर तिलक लगाकर हाथ में कलावा बांधा। सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे वीडियो में ये लोग धमकी देते हुए भी नजर आए। "लेंसकार्ट कंपनी बंद करो। बंद करो।" चेतावनी देते हुए कहा- माफी मांगो, नहीं तो देश में कहीं भी आपकी दुकान खुलने नहीं देंगे। इस वीडियो पर जवाब देते हुए आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने पूछा- "इनको गुंडागर्दी का लाइसेंस किसने दिया?" इसके साथ ही उन्होंने बजरंग दल और भाजपा पर निशाना साधा है।
माथे पर तिलक लगाकर बांधा कलावा
सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा वीडियो उत्तराखंड के देहरादून का बताया जा रहा है। वीडियो में एक शख्स कहता है- लेंसकार्ट के सीनियर एडवाइजर का एक मेल आता है कि हमें अपने कर्मचारियों के हाथों में कलावा और माथे पर तिलक बैन कर देना चाहिए। शख्स ने इसे हिंदुस्तान की पहचान बताते हुए कहा- हिंदुस्तान में आप अपना साम्राज्य चलाएंगे, दुकान चलाएंगे, पैसे सनातन धर्म के लोगों से लेंगे, हिंदु से लेंगे।
बजरंग दल ने लेंसकार्ट को दी धमकी
वीडियो में उसने आगे कहा- मैं इनको चेतावनी देना चाहता हूं कि या तो दो दिन के अंदर अपनी ऑफिशियल साइट पर एक माफीनामा भेजोगे कि हम अपने किसी भी कर्मचारी को माथे पर तिलक लगाने और हाथ में कलावा बांधने से नहीं रोकोगे। वरना आपकी लेंसकार्ट का पूरा पूरा विरोध देश के हर शहर में करेंगे। इसके बाद सवाल करते हुए कहा- आप मुस्लिम प्रेमी हैं क्या? 56 देश हैं, वहां खोल लीजिए अपनी दुकान। हिंदुस्तान में जब तक माफी नहीं मांगेगे, एक भी शोरूम खुलने नहीं दिया जाएगा।
आप सांसद ने बजरंग दल और भाजपा को लिया आड़े हाथ
संजय सिंह ने वीडियो को रीट्वीट करते हुए कहा- इनको गुंडागर्दी का लाइसेंस किसने दिया? लेंस्कार्ट के मालिक पीयूष बंसल तो खुद हिंदू हैं वो कोई ऐसा आदेश क्यों देंगे? जिससे हिंदू भावना आहत हो। हर कंपनी का अपना ड्रेस कोड होता है जिसको हिंदू मुस्लिम सब मानते हैं। भाजपाईयों ने देश को नफ़रत की फैक्ट्री बना दिया है।
अब समझिए क्या है मामला
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर एक पुराना कंपनी डॉक्यूमेंट वायरल हो गया। इसमें कहा गया था कि कर्मचारियों को बिंदी और तिलक जैसे धार्मिक प्रतीक पहनने की अनुमति नहीं है। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने नाराजगी जताई और कंपनी का बहिष्कार करने की मांग भी उठी। इस मामले पर कंपनी के संस्थापक पीयूष बंसल ने साफ किया कि वायरल हुआ डॉक्यूमेंट पुराना है और यह कंपनी की मौजूदा पॉलिसी को नहीं दिखाता।
कंपनी ने इस विवाद पर मांगी माफी
उन्होंने कहा कि कंपनी की वर्तमान नीति में बिंदी और तिलक जैसे किसी भी धार्मिक प्रतीक पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने इस गलतफहमी और लोगों की चिंता के लिए खेद भी जताया। बाद में कंपनी ने इस विवाद पर माफी मांगी और एक नया “स्टोर स्टाइल गाइड” जारी किया। इसमें कहा गया है कि कर्मचारी काम के दौरान अपने धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक पहन सकते हैं।
लेखक के बारे में
Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।
रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
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