देहरादून की हवा हुई साफ, 7 पायदान की छलांग, ऋषिकेश और काशीपुर पिछड़े; जानें- रैंकिंग
देहरादून की हवा में सुधार का असर स्वच्छ वायु सर्वेक्षण की रैंकिंग में भी दिखा है। वहीं, ऋषिकेश और काशीपुर पिछड़े हैं। ऋषिकेश 180.7 अंक के साथ 16वें व काशीपुर 178.2 अंक के साथ 21वें स्थान पर रहा।

देहरादून की स्वच्छ वायु रैंकिंग में सुधार एक साल का नहीं, बल्कि कई वर्षों के प्रयास का नतीजा है। बीच में रैंकिंग गिरी, लेकिन इसके बाद लगातार सुधार हुआ। हवा में मौजूद सूक्ष्म कण पीएम का स्तर भी कम हुआ है। देहरादून से ओम प्रकाश सती की रिपोर्ट।
देहरादून की हवा में सुधार का असर स्वच्छ वायु सर्वेक्षण की रैंकिंग में भी दिखा है। दून ने एक वर्ष में सात स्थान की छलांग लगाई है। तीन से दस लाख आबादी वाले शहरों की श्रेणी में दून 12वें स्थान पर पहुंच गया है। वर्ष 2025 में दून 19वें स्थान पर था।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत सोमवार को स्वच्छ वायु सर्वेक्षण की रैंकिंग जारी की। इसमें देहरादून को 182 अंक मिले। वहीं, तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में ऋषिकेश 180.7 अंक के साथ 16वें व काशीपुर 178.2 अंक के साथ 21वें स्थान पर रहा। गत वर्ष ऋषिकेश 14वें और काशीपुर 18वें स्थान पर थे।
राजधानी की रैंकिंग में सुधार के पीछे प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए कई काम अहम रहे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम और एमडीडीए ने जागरूकता अभियान चलाए। नियमों का पालन कराने पर जोर दिया गया। सड़क की धूल रोकने के उपाय किए गए। यांत्रिक सड़क सफाई व पानी के छिड़काव जैसे प्रयोग हुए। ड्रोन से भी पानी की बौछार की गई। एनसीएपी के तहत शहर में किए गए कामों को भी रैंकिंग में अंक मिले।
दून के नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय ने कहा कि दून की रैंकिंग में निरंतर सुधार हो रहा है। अगले साल संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर और बेहतर रैंक प्राप्त करने की दिशा में कार्य करेंगे। एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि दून को स्वच्छ-सुंदर बनाने को एमडीडीए निरंतर प्रयासरत है। यह उपलब्धि सभी संबंधित विभागों के सम्मिलित प्रयासों का परिणाम है।
पीएम-2.5 में सबसे कमी काशीपुर में
स्वच्छ वायु कार्यक्रम के आंकड़ों में पीएम-2.5 के स्तर में भी सुधार हुआ है। काशीपुर मनें 2019-20 में पीएम-2.5 का स्तर 220.38 था। 2025-26 में यह घटकर 50.59 रह गया। यानी करीब 77.04 प्रतिशत की कमी आई।
दून में भी घटा, ऋषिकेश में इजाफा
देहरादून में 2019-20 में पीएम-2.5 का स्तर 93.04 था। 2025-26 में यह घटकर 72.25 रह गया। इसमें 22.34 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई। ऋषिकेश के लए 2019-20 का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। वर्ष 2020-21 में पीएम-2.5 का स्तर 79.77 था। 2025-26 में यह घटकर 61.16 रह गया। यानी 23.33 प्रतिशत की कमी आई। हालांकि 2024-25 में यह स्तर 50.49 था जो 2025-26 में बढ़कर 61.16 हो गया।
पीसीबी के सदस्य सचिव डॉ.पराग मधुकर धकाते ने बताया कि सर्वेक्षण में दून का ऊपर आना बड़ी उपलब्धि है। उक्त तीनों शहरों में वायु प्रदूषण की निगरानी की जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए कदमों को लेकर उन्होंने बताया कि बायोमास जलाने पर सख्ती की गई है। धूल रोकने को कच्ची सड़कों को पक्का करने पर काम चल रहा है। प्रदूषण फैलाने वालों पर जुर्माना और चालान की कार्रवाई भी की जा रही है।
दून :2024 में 37वीं, अब 12वीं रैंक
देहरादून को वर्ष 2022 और 2023 में देश में 18वीं रैंक मिली थी। वर्ष 2024 में स्थिति खराब हुई और दून 37वें स्थान पर खिसक गया। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण के उपाय तेज किए गए। वर्ष 2025 में दून 19वें स्थान पर पहुंचा। अब 2026 में 12वीं रैंक मिली है। यानी 2025 से 2026 के बीच सात पायदान का सुधार हुआ है। वहीं 2022-23 की 18वीं रैंक के मुकाबले भी दून अब छह पायदान ऊपर है।
ऋषिकेश : 31 से 16वें स्थान तक पहुंचा
ऋषिकेश वर्ष 2023 और 2024 में 31वें स्थान पर था। 2025 में इसमें सुधार हुआ और रैंकिंग 14वीं हो गई। इस साल रैंकिंग दो पायदान घटकर 16वीं रही।
काशीपुर : 26वीं से 21वीं रैंक का सफर
काशीपुर 2023 में 26वें स्थान पर था। 2024 में यह 19वें और 2025 में 18वें स्थान पर पहुंचा। इस साल रैंकिंग घटकर 21वीं हो गई यानी 2025 के मुकाबले तीन पायदान की गिरावट हुई।
धोरण वार्ड बना नंबर वन
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत नगर निगम देहरादून का धोरण वार्ड (अपनी जनसंख्या के तहत-2011 के आधार पर) पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा। वार्ड में सड़क किनारे हरियाली बढ़ाने, टाइलें लगवाने और फुटपाथ का निर्माण प्रगति पर है। धोरण में मैकेनाइज्ड कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन बनने का भी लाभ हुआ। इसके अलावा एमडीडीए की ओर से वार्ड के अंतर्गत व्यापक स्तर पर पौधरोपण करवाया गया है।
इन कामों पर मिलते हैं अंक
● बायोमास और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
● सड़क की धूल पर नियंत्रण
● वायु गुणवत्ता में सुधार
● निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट का प्रबंधन
● वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण
● औद्योगिक उत्सर्जन पर नियंत्रण
● अन्य प्रदूषण स्रोतों पर नियंत्रण
● जनजागरूकता और सूचना-शिक्षा-संचार गतिविधियां


