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देहरादून की हवा भी जहरीली हुई, कानपुर-पटना से ज्यादा पलूशन; AQI 300 पार

देहरादून की हवा भी जहरीली हुई, कानपुर-पटना से ज्यादा पलूशन; AQI 300 पार

संक्षेप:

दिल्ली ही नहीं अब देवभूमि उत्तराखंड की आबोहवा में भी जहर घुल रहा है। देहरादून में पिछले कुछ दिनों से पलूशन बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। पलूशन का आलम यह है कि एक्यूआई कानपुर और पटना महानगरों से भी आगे है।

Dec 04, 2025 12:24 pm ISTGaurav Kala ओम प्रकाश सती, देहरादून, हिन्दुस्तान
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दिल्ली में पलूशन ने लोगों का जीना मुहार कर दिया है। दिल्ली में पलूशन पर सुप्रीम कोर्ट तक चिंता जता चुका है। पलूशन सिर्फ दिल्ली ही नहीं देवभूमि उत्तराखंड की वादियों तक भी फैल रहा है। देहरादून की हवा भी जहरीली हो रही है। एक्यूआई रिकॉर्ड 300 तक पहुंच गया। देहरादून की वायु गुणवत्ता कानपुर और पटना से भी ज्यादा खराब हुई है। पिछले कुछ दिनों से लगातार एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।

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मंगलवार रात अधिकतम एक्यूआई 300 ग्राम प्रति मीटर क्यूब पार पहुंच गया था। बुधवार सुबह तक औसत एक्यूआई 140 के पार दर्ज किया गया। यह कानपुर, पटना और प्रयागराज जैसे बड़े शहरों से ज्यादा रहा। दीवाली के बाद चटख धूप खिलने से दून में वायु प्रदूषण कम होने लगा था। यह पिछले करीब एक महीने से औसतन 70 से 80 तक रहा जबकि अधिकतम 170 तक था। पिछले दो तीन दिन में अचानक प्रदूषण बढ़ने लगा है। खासकर रात में प्रदूषण का स्तर काफी ज्यादा होने लगा है।

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कब बढ़ रहा पलूशन

रात करीब 11 बजे से सुबह चार बजे तक प्रदूषण बढ़ रहा है। मंगलवार और बुधवार को एक्यूआई अधिकतम 300 तक पहुंचा है। यह बेहद खराब श्रेणी में है। वहीं कानपुर का एक्यूआई बुधवार सुबह 114, पटना का 106 और प्रयागराज का 130 रहा।

एक्सपर्ट क्या कह रहे

दून विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के एचओडी प्रो. विजय श्रीधर के अनुसार तापमान घटने से प्रदूषण बढ़ रहा है क्योंकि हवा ऊपर की ओर नहीं जा पा रही है। इसके अलावा बायोमास बर्निंग सहित तमाम कारण हैं जो प्रदूषण को बढ़ा रहे हैं। आगे और प्रदूषण बढ़ने की संभावना है। एक तंदूर से 50 ग्राम प्रति मीटर क्यूब निकलते हैं प्रदूषित करने वाले कण प्रदूषण के पीछे एक बड़ा कारण शहर में रोजाना जलने वाले एक हजार तंदूर और भट्ठियां भी हैं।

ये विभिन्न होटल, ढाबों, रेस्टोरेंट और बेकरियों में जल रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार एक तंदूर पांच घंटे अगर दस किलो लकड़ी के साथ जलता है तो करीब 50 ग्राम प्रति मीटर क्यूब प्रदूषित कण पैदा करता है। वहीं कोयले या पैट कोक के साथ तेल आदि से ये प्रदूषण और ज्यादा होता है।

एक कार एक लीटर ईंधन में फैला रही 1.5 ग्राम प्रदूषण

शहर में जाम में खड़े और धीमी गति से चलने वाले वाहन भी वायु प्रदूषण का कारण हैं। ये वाहन सामान्य गति से चलने वाले वाहनों से करीब चार गुना प्रदूषण ज्यादा करते हैं। डा. विजय श्रीधर के अनुसार एक सामान्य कार एक लीटर तेल में करीब 1.5 ग्राम प्रति मीटर क्यूब प्रदूषित कण वायु में छोड़ती है। वहीं यह 130 ग्राम कार्बन डाई आक्साइड छोड़ती है। ऐसे वाहन पहले और दूसरे गियर में चल रहे हों तो करीब चार गुना ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं।

शादियों ने बजाई आबोहवा की बैंड

विशेषज्ञों के अनुसार वायु प्रदूषण अचानक बढ़ने के पीछे बड़ा कारण पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही शादियां भी हैं। शहर में रोजाना दो से तीन सौ शादियां हो रही हैं। इनमें पटाखे और खाना बनाने के लिए आग व तंदूर आदि भी जलाए जा रहे हैं। जो वायु की गुणवत्ता को खराब कर रहे हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में धीरे धीरे चलने वाले वाहन भी प्रदूषण को बढ़ रहे हैं।

Gaurav Kala

लेखक के बारे में

Gaurav Kala
गौरव काला को नेशनल, राजनीति, अंतरराष्ट्रीय, क्राइम और वायरल समाचार लिखना पसंद हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 10 साल कार्य का अनुभव। लाइव हिन्दुस्तान से पहले अमर उजाला, दैनिक जागरण और ईटीवी भारत जैसे मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। इन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है। और पढ़ें

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