देहरादून में 3 रुपए महंगी हुई CNG, 8 दिन में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तीसरी बार बढ़ोतरी

हिन्दुस्तान, देहरादून
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देहरादून में पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतें एक बार फिर बढ़ गई हैं। सीएनजी तीन रुपये की बढ़ोतरी के साथ 97.50 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। पेट्रोल में 95 पैसे, डीजल में 92 पैसे महंगा हुआ है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें आठ दिन में तीसरी बार बढ़ी हैं।

देहरादून में 3 रुपए महंगी हुई CNG, 8 दिन में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तीसरी बार बढ़ोतरी

देहरादून में पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतें एक बार फिर बढ़ गई हैं। सीएनजी तीन रुपये की बढ़ोतरी के साथ 97.50 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। पेट्रोल में 95 पैसे, डीजल में 92 पैसे महंगा हुआ है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें आठ दिन में तीसरी बार बढ़ी हैं।

मध्य पूर्व में चल रहे विवाद के चलते ईंधन की कीमतों में लगातार तेजी आ रही है। शनिवार को बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल 98.05 रुपये और डीजल 93.18 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इससे पहले पेट्रोल 97.10 और डीजल 92.26 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था। इस महीने 15 मई को पेट्रोल 2.74 रुपये और डीजल 3.01 रुपये महंगा हुआ था। इसके बाद 19 मई को पेट्रोल और डीजल में क्रमशः 85 और 91 पैसे की बढ़ोतरी हुई थी।

आम आदमी की जेब पर असर पड़ेगा

पेट्रोल पंप डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष मित्तल ने बताया कि तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करती हैं। निर्यात में कमी के चलते संभवतः सरकार की ओर से कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। उधर, ईंधन की कीमतें बढ़ने से रोजमर्रा के उत्पादों की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।

मई में सीएनजी छह रुपये महंगी

गैस कंपनियों ने सीएनजी की कीमतों में इस महीने दूसरी बार बढ़ोतरी की है। देहरादून में शनिवार को तीन रुपये बढ़ोतरी के साथ सीएनजी 97.50 रुपये प्रति किलो बिकी। आठ मई को भी सीएनजी की कीमतों में तीन रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई थी। सीएनजी की कीमतें लगातार बढ़ने से कमर्शियल वाहनों को झटका लगा है। यात्रा और पर्यटन सीजन में बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों पर भी इसका असर पड़ेगा, क्योंकि उत्तराखंड में सीएनजी की कीमतें यूपी और दिल्ली से अधिक हैं।

उत्तराखंड में मई में पेट्रोल की खपत 14 फीसदी बढ़ी

उत्तराखंड में पिछले साल के मुकाबले मई माह में ईंधन की खपत में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह तेजी ऐसे वक्त पर आई है जब ईंधन संकट चल रहा है और सरकार ईंधन बचत के उपायों पर जोर दे रही है।इंडियन ऑयल के राज्य समन्वयक कृष्ण कुमार गुप्ता ने बताया कि तेल विपणन कंपनियों ने पिछले साल मई की तुलना में इस बार 21 मई तक पेट्रोल में 14 फीसदी और डीजल में 6.7 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की है। जबकि बीते अप्रैल माह के मुकाबले पेट्रोल की खपत नौ फीसदी और डीजल की खपत पांच फीसदी बढ़ी है।

उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल की डिमांड बढ़ने के बावजूद राज्य में तेल कंपनियों की तरफ से पर्याप्त आपूर्ति की जा रही है। राज्य में इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल ईंधन की आपूर्ति करती हैं और राज्य सरकार के साथ बेहतर समन्वय के साथ ईंधन की सुचारु आपूर्ति की जा रही है।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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